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बारिश में बसों की छत टपकती

Wed, 20 Jul 2016 11:11 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
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रोडवेज बसों में ऐसी सीटों पर बैठ सफर करते हैं यात्री। - फोटो : अमर उजाला
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यात्री किराया तो बढ़ा दिया गया, लेकिन यात्रियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की सुध राज्य परिवहन निगम को नहीं है। यात्री हित को लेकर विभागीय अधिकारी कितना गंभीर हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 47 बसों के बेड़े वाले अकबरपुर डिपो में छह बसें ऐसी हैं, जो नीलामी सीमा को पार कर चुकी हैं। 10 बसें नीलामी सीमा पार करने की कगार पर हैं। इसके अलावा किसी बस के शीशे तो किसी की सीटें क्षतिग्रस्त हैं। कुछ बसों की तो छत जर्जर है। बारिश होने पर बस के अंदर पानी टपकता है।  
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यात्री हित को लेकर राज्य परिवहन निगम पूरी तरह लापरवाह बना हुआ है। किराया तो समय-समय पर बढ़ाया जाता है, लेकिन उसके अनुसार यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं देने को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। बीते एक वर्ष में तीन बार यात्री किराया बढ़ाया जा चुका है। इसी क्रम में बीते मंगलवार को किराया 81 पैसे से बढ़ाकर 86 पैसे प्रति किमी कर दिया गया।

किराया तो बढ़ा दिया गया, लेकिन न तो बसों की दशा सुधारने को लेकर कोई ठोस कदम उठाया जा सका और न ही अकबरपुर डिपो में बेड़े में बसों की संख्या में ही वृद्धि की गई। अकबरपुर डिपो की उपेक्षा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि डिपो में कुल 47 बसों का बेड़ा है। इसमें छह बसें ऐसी हैं, जो नीलामी की सीमा पार कर चुकी हैं, जबकि 10 बसें नीलामी सीमा पार करने के निकट पहुंच चुकी हैं।
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इसके अलावा अधिकांश बसों के शीशे टूटे हुए हैं, तो उनकी सीटें भी जर्जर हो गईं हैं। कुछ बसें तो ऐसी हैं, जिनकी छत बुरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। बारिश में इनसे पानी टपकता है, जिससे यात्रियों को विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। 

इतना ही नहीं बेड़े में शामिल बसें कितनी जर्जर हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अक्सर जहां तहां बसें खड़ी हो जाती हैं। अधिकांश बसें तो ऐसी हैं, जिन्हें इर्दगिर्द के जनपदों तक ही सीमित रखा गया है।

उन्हें लंबी दूरी पर नहीं भेजा जाता। जर्जर बसों की दशा सुधारने एवं बेड़े में बसों की संख्या बढ़ाने की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन इस तरफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। नतीजतन इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है।

उपेक्षा के चलते परिवहन निगम की बसों से यात्रियों का भी मोहभंग होने लगा है। इसके चलते डिपो की आमदनी में कमी होती जा रही है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015 में जून तक डिपो की आय एक करोड़ 45 लाख 26 हजार 705 रुपये थी, जबकि वर्ष 2016 में जून तक आमदनी घटकर एक करोड़ 13 लाख 7 हजार 724 रुपये हो गई। 
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