आलापुर (अंबेडकरनगर)। रामनगर के मसेना मिर्जापुर स्थित शांति विहार कॉलोनी में आयोजित चातुर्मास कथा साधना के तहत चल रही श्री राम कथा में प्रवाचक ने राजा जनक और राजा दशरथ के ऐतिहासिक संवाद को श्रद्धालुओं के सामने रखा। कहा कि राजा जनक व दशरथ का संबंध सम्मान और विश्वास है।
प्रवाचक आचार्य वेदांती महराज ने बताया कि जब राजा दशरथ ने अपने पुत्र राम और सीता के विवाह हेतु मिथिला जाने का निश्चय किया, तो राजा जनक ने न केवल उन्हें आमंत्रित किया, बल्कि उनका स्वागत भी अत्यंत विनम्रता और आदर के साथ किया। राजा जनक का यह स्वागत हमें अपने जीवन में सही आचार, संस्कार और परंपरा को अपनाने का मार्ग दिखाता है।राजा दशरथ ने महर्षि वशिष्ठ की सलाह से राजा जनक को बरात भेजने का प्रस्ताव स्वीकार किया और स्वयं को याचक बताकर बरात लेकर मिथिला पहुंचे। राम और सीता का पुष्प वाटिका में हुआ पहला मिलन श्रद्धालुओं को यह संदेश देता है कि संस्कारों का पालन जीवन में सबसे महत्वपूर्ण है। यह आदर्श हमें अपने जीवन में सच्चे मित्र व रिश्ते बनाने की प्रेरणा देता है।