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अधिकारियों की सूझबूझ से आगे नहीं बढ़ा उपद्रव

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अंबेडकरनगर। ट्रॉला से हुई युवक की मौत के बाद हुए उपद्रव को और व्यापक होने से रोकने में रविवार को प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की सूझ बूझ काम कर गई। आनन फानन में पहुंचे डीएम और एसपी ने ग्रामीणों का आक्रोश और ज्यादा भड़कने से रोकने में समझबूझ दिखाई। वरना ग्रामीणों ने एआरटीओ के वाहन को फूंकने के बाद ट्राला को भी फूंकने की तैयारी कर ली थी। ग्रामीण बड़ी तादाद में एकत्र होकर फिर से प्रदर्शन को तैयार हो रहे थे, लेकिन डीएम ने 7 लाख की सहायता दिलाने का भरोसा देकर ग्रामीणों को राजी कर लिया। ग्रामीणों को समझाया कि फरार ट्रॉला ड्राइवर के विरुद्ध कठोरतम कार्यवाई होगी।
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जलालपुर के पट्टी में ट्रॉला से कुचलकर मुरवाह निवासी शनि की मौत मामले में हुआ उपद्रव और व्यापक हो जाता यदि अधिकारियों ने दूरदृष्टि न दिखाई होती। हादसे के तत्काल बाद उपजे आक्रोश में तो ग्रामीणों ने एआरटीओ का वाहन फूंक दिया, लेकिन कुछ देर बाद उन्हें समझ में आया कि इसमें गलती तो ट्राला चालक की थी। हालांकि तब तक भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच चुका। इसके बाद जब ट्राले को जेसीबी की मदद से बाहर निकाला गया तो ग्रामीणों ने उसे भी फूंकने की कोशिश की।
इस बीच मौके पर डीएम सैमुअल पॉल एन और एसपी आलोक प्रियदर्शी मौके पर पहुंच गए। दोनों अधिकारी सीधे जलालपुर कोतवाली पहुंचे, वहां संबंधित ग्राम पंचायत के पंचायत प्रतिनिधियों और परिवारीजनों से बात की। अधिकारियों ने समझाया कि पूरा प्रशासन उनके साथ है।
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डीएम ने वादा किया कि सरकार के प्रावधानों के अनुरूप पांच लाख की सहायता परिजनों को दी जाएगी। हिट एंड रन केस का मामला होने के कारण परिवहन अधिकारियों ने दो लाख रुपए की सहायता दिए जाने का भरोसा दिया। एसपी ने कहा कि ट्राला ड्राइवर ने इस हादसे को अंजाम दिया है, उसके विरुध्द कठोरतम कार्यवाई की जाएगी।
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