अंबेडकरनगर। जिले के शहरी और ग्रामीण अंचलों में रामलीला मंचन की परंपरा इस बार भी पूरी भक्ति और भव्यता के साथ निभाई जा रही है। मंगलवार शाम बहोरिकपुर, जलालपुर और बसखारी में हुए मंचनों में धार्मिक भावनाओं, सांस्कृतिक समरसता और कलाकारों की जीवंत प्रस्तुति ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
बहोरिकपुर की रामलीला में राम, लक्ष्मण और सीता के चित्रकूट आगमन, केवट संवाद और भरत मिलाप जैसे भावनात्मक प्रसंगों का सजीव मंचन हुआ। राजा दशरथ के वियोग में प्राण त्यागने और भरत द्वारा सिंहासन अस्वीकार कर राम की खोज में वन गमन का दृश्य अत्यंत मार्मिक रहा। चित्रकूट में भरत-राम संवाद और कैकेई के प्रति भरत का आक्रोश दर्शकों की आंखें नम कर गया। प्रमुख भूमिकाओं में प्रदीप श्रीवास्तव, ऋषि कश्यप, राना कुंवर भारती, शीतल, गुड्डू सिंह व अन्य कलाकारों की अभिनय क्षमता ने मंच को जीवंत कर दिया।
अंगद की गर्जना से गूंजा मंच
जलालपुर। रामलीला मैदान में विभीषण की शरणागति, रामसेतु निर्माण और लंका-दहन के दृश्य प्रस्तुत किए गए। रावण के दरबार में अंगद का आत्मविश्वास और वीर रस से भरी चुनौती ने खूब तालियां बटोरीं। कोई भी योद्धा उनका जमा हुआ पैर हिला नहीं सका। साथ ही गल्ला मंडी में रामकथा मानस पाठ के माध्यम से कथावाचिका प्रियंका पांडेय ने प्रभु श्रीराम के जीवन प्रसंगों को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। आयोजन में समिति अध्यक्ष संजीव मिश्र व अन्य गणमान्य जन उपस्थित रहे।
नारद मोह की लीला ने मोहा मन
बसखारी। बाजार की रामलीला का शुभारंभ भगवान विष्णु की झांकी और आरती से हुआ। मंचन का मुख्य आकर्षण नारद मोह की लीला रही, जिसमें नारद मुनि की तपस्या, देवराज इंद्र की चाल और भगवान विष्णु की माया का अद्भुत चित्रण किया गया। विष्णु द्वारा रचित मोहजाल और स्वयंवर में नारद की विफलता ने दर्शकों को अध्यात्म और मानवीय भावनाओं की गहराई से जोड़ा।