अंबेडकरनगर। कटेहरी उपचुनाव में पत्नी को सपा से टिकट दिलाने वाले सांसद लालजी वर्मा का स्वयं और परिवार का चुनावी दायरा जिले की पांच में से तीन विधानसभा सीटों तक फैला है। दो सीटों पर जीत का सिलसिला भी चलता आया है।
प्रदेश की राजनीति में बड़ी दखल रखने वाले सपा राष्ट्रीय महासचिव सांसद लालजी वर्मा ने पहला विधानसभा चुनाव वर्ष 1991 की राम लहर में भी जनता दल के टिकट पर टांडा से जीता था। दो वर्ष बाद हुए चुनाव में उन्हें जनता दल के टिकट पर ही बसपा से हार मिली। 1996 के चुनाव तक बसपा में शामिल हो चुके लालजी सपा प्रत्याशी को हराकर बाद में विधायक बने। 2002 और 2007 में भी वे टांडा से बसपा के टिकट पर विधायक चुने गए।
इसी बीच परिसीमन के चलते स्थिति में परिवर्तन हुआ। लालजी ने 2012 का चुनाव टांडा छोड़ कटेहरी विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर लड़ा लेकिन सपा प्रत्याशी शंखलाल माझी से हार गए। पांच वर्ष बाद 2017 में यहीं से बसपा के टिकट पर विधायक बने। 2022 के चुनाव से पहले सपा में शामिल हो गए। पार्टी ने टिकट भी दिया, इस बार भी जीत मिली।
अब उनकी ही छोड़ी सीट के उपचुनाव में पत्नी शोभावती सपा से चुनाव मैदान में हैं। लालजी वर्ष 2019 में जलालपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में अपनी बेटी डॉ. छाया वर्मा को बसपा के टिकट पर चुनाव मैदान पर उतार चुके हैं। उस समय विजयी हुए सपा प्रत्याशी सुभाष राय को 72,589 मत जबकि छाया को 71,813 मत मिले थे। मुकाबला अत्यंत रोचक था, जिसमें 776 मतों से डॉ. छाया को हार का सामना करना पड़ा था। (संवाद)