अम्बेडकरनगर। नौकरी न मिलने से क्षुब्ध होकर प्रयागराज में आत्महत्या करने वाले महरुआ निवासी युवक विकास ने आईपीएस बनकर परिवार का संकट दूर करने का सपना संजो रखा था। उसने यह सपना पाले हुए दुनिया को जिस ढंग से अलविदा कहा उससे परिवार से लेकर गांव के सभी वाशिंदे हैरत में हैं। दरअसल वह पढ़ाई को लेकर अत्यंत गंभीर रहता था। जब भी गांव आता तो बच्चों और युवाओं को अच्छे ढंग से पढ़ने की ही सीख देता। दो भाइयों में से बड़े भाई ने पहले ही आत्महत्या कर ली थी। वह खेती करने वाले मां बाप के अलावा दो बहनों का पेट पालने और भविष्य संवारने के लिए डटा था। कहता था कि आईपीएस बन जाऊंगा तो सब मुश्किल दूर हो जाएंगी। इस सपने को साकार करने और परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लिए वह ट्यूशन भी करता था लेकिन नौकरी न मिलने की टीस ने सब कुछ चकनाचूर कर दिया।
प्रयागराज में रहकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले जिले के महरुआ थाना क्षेत्र अंतर्गत मानिकपुर बसाइतपुर निवासी विकास सिंह (31) ने किराए के रूम में फांसी लगाकर जान दे दी। प्रयागराज पुलिस को एक सुसाइड नोट मिला है। जिसमें नौकरी न मिलने से क्षुब्ध होकर जान देने का जिक्र है। विकास के इस कदम ने न सिर्फ परिजनों पर ग्रामवासियों समेत रिश्तेदारों और अन्य को भी झकझोर दिया है। दरअसल विकास मेधावी था। आर्थिक मुश्किलों से जूझ रहे परिवार को मौजूदा हालात से उबार कर बेहतर जिंदगी के सपने उसने संजो रखे थे। वह इन सपनों के इर्द गिर्द ही वर्षों से जी रहा था। उसका मुख्य सपना आईपीएस बनने का था। वह इसके लिए कड़ा परिश्रम पूरी लगन के साथ कर रहा था। लक्ष्य पर फोकस करते हुए वह अन्य प्रतियोगी परीक्षा भी समय समय पर देता रहा। उसका सपना था आईपीएस बनकर परिवार को वह सब सुविधाएं प्रदान करना जिससे आराम का जीवन व्यतीत हो सके।
इन सबके बीच उसके द्वारा नौकरी न मिलने को लेकर आत्महत्या कर लेने की घटना ने सभी को अवाक कर दिया। किसी को यह विश्वास ही नहीं हो रहा कि विकास यह कदम उठा सकता है। बुधवार को गांव में मिले पट्टीदारों आदि ने बताया कि विकास बहुत होनहार था। वह तो जब भी गांव आता तो बच्चों को पढ़ाई की सीख देता रहता। गांव के बड़े बुजुर्गों से भी वह सकारात्मक बातें करता। इन्हीं सब के चलते लोग हैरतजदा हैं कि परिवार को खुशियां देने का संकल्प लेने वाला विकास उन्हें यूं ही छोड़कर क्यों चला गया। ग्रामीणों के अनुसार विकास का चयन बीते दिनों महज एक नंबर के अंतर से रह गया था। वह इससे पहले भी 4 बार सफल नहीं हो पाया था। समय निकला जा रहा था जबकि इस बीच परीक्षा न होने से उसकी मनोदशा कहीं न कहीं बिगड़ती जा रही थी।
बड़े भाई ने पहले ही कर ली थी आत्महत्या
महरुआ-नौकरी न मिलने से क्षुब्ध होकर जान देने वाले विकास के बड़े भाई ने भी 2007 में आत्महत्या कर ली थी। मानिकपुर बसाइतपुर निवासी किसान अनिल कुमार सिंह के दो पुत्रों में विकास छोटा था। बड़े पुत्र प्राइस सिंह ने 22 वर्ष की उम्र में घर के भीतर ही फांसी लगाकर जान दे दी थी। कोई खास कारण सामने नहीं आया था। उसका विवाह नहीं हुआ था। विकास की भी शादी अभी नहीं हुई थी क्योंकि वह आईपीएस बनने से पहले शादी करने को तैयार नहीं था।
बोला था विकास, पहले करूंगा बहन की शादी
विकास की दो बहनें हैं। लवली (25) को वह बीएड की पढ़ाई करवा रहा था। निकटवर्ती जनपद सुल्तानपुर के केएनआई में दाखिला करवाया था। दूसरी बहन शिवानी (22) भीटी के राम लखन महाविद्यालय से स्नातक कर रही है। विकास ट्यूशन कर बहनों की पढ़ाई समेत परिवार का खर्च संभाले हुए था। वह प्रयागराज में ही ट्यूशन पढ़ाता था। उसने घर वालों से कहा था कि मैं पहले अपनी बहनों की शादी अच्छे से करूंगा, फिर अपनी। विकास अपनी मां से अक्सर कहता था कि मां आप शादी की चिंता न करो। मुझे आईपीएस बनने तो दो। धूमधाम से करेंगे हम सबका विवाह।
मेधावी और संयमित था विकास
ग्रामीणों ने बताया कि विकास अत्यंत संयमित और मेधावी था। उसका व्यवहार बहुत बढ़िया रहता था। कोरोना संक्रमण बढ़ने पर वह लंबे समय से गांव में था तो सबसे घुलमिलकर रहता था। बीते 13 जून को ही वह प्रयागराज गया था जहां एक माह में ही मनहूस खबर आ गई। ग्रामीणों ने बताया कि वह पढ़ने में शुरू से तेज था। बीएड और पीएचडी की डिग्री हासिल करने वाला विकास साइंस में काफी तेज था। इसी के बल पर वह कई ट्यूशन पढ़ा लेता था।
प्रयागराज गए परिजन व अन्य
विकास के आत्महत्या करने की खबर मिलते ही उसके पिता समेत अन्य परिजन प्रयागराज रवाना हो गए। पोस्टमार्टम के बाद उसका अंतिम संस्कार प्रयागराज में ही करना तय हुआ है। घटना के बाद से गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। महिलाएं रह रहकर रो रही हैं। जिस परिवार के दोनों पुत्र आत्महत्या कर लिए हों उनके माता पिता को समझा पाना और सांत्वना दे पाना लोगों के लिए कठिन हो रहा है।