पुनरीक्षित लागत के बाद लगभग 13 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले इस भवन के निर्माण में कभी धनाभाव की स्थिति सामने आई, तो कभी कार्यदायी संस्था की मनमानी। राजनैतिक उठापटक का शिकार बने लोहिया भवन का निर्माण कार्य पूर्ण होने की संभावना उस समय और प्रबल हुई, जब इसकी आधारशिला रखने वाली समाजवादी पार्टी की सरकार पुन: प्रदेश में बनी।
हालांकि लगभग साढ़े तीन वर्ष बीतने को है, लेकिन धनाभाव के चलते इसका निर्माण अब तक पूर्ण नहीं हो सका है। बताते चलें कि गत सपा सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने बहुउद्देशीय लोहिया भवन की आधारशिला रखी थी। उस समय उसकी लागत लगभग 7 करोड़ थी।
निर्माण कार्य की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम को सौंपी गई। निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ, लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता परिवर्तन होने पर बसपा शासनकाल में धनाभाव के चलते अधिकांशत: काम ठप रहा। इसके बाद गत विधानसभा चुनाव में सपा के सत्ता में आने के बाद भी इसके निर्माण में अपेक्षित तेजी नहीं आ पाई।
इन्हीं सबका खामियाजा यह रहा कि जो परियोजना 7 करोड़ में पूरी हो जानी चाहिए थी, उसकी लागत बढ़कर अब 13 करोड़ के करीब पहुंच गई है। जिला पंचायत राज अधिकारी अनिल कुमार सिंह ने बताया कि अब धनाभाव नहीं है। पूरा पैसा स्वीकृत हो चुका है। जल्द ही कार्य पूरा करा लिया जाएगा। इन दिनों आडीटोरियम में काम चल रहा है।