भीटी (अंबेडकरनगर)। क्षेत्र के जुआ गांव में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। प्रवाचक संजय उपाध्याय ने श्रद्धालुओं को जीवन दर्शन दिया।
उन्होंने बताया कि संसार का सागर बाहर नहीं, हमारे अपने हृदय में है। हमारे अंदर उठने वाले विचार ही मंथन हैं।किसी में विष, तो किसी में अमृत की संभावना। उन्होंने स्पष्ट किया कि नकारात्मकता (विष) सबसे पहले सामने आती है, लेकिन ठीक उसी तरह जैसे देवताओं ने धैर्य रखा,जो धैर्यवान होता है, वही जीवन का अमृत पाता है। प्रवाचक ने कहा कि मन को शांति चाहिए तो विचारों का चुनाव सही कीजिए। क्रोध, ईर्ष्या, घृणा यह विष हैं, जो जीवन को नष्ट करते हैं। प्रेम, करुणा और धैर्य यही जीवन का अमृत हैं। समस्याएं कभी खत्म नहीं होतीं, पर विश्वास हो तो समस्या भी रक्षा बन जाती है। विपरीत परिस्थितियां चरित्र को मजबूत करती हैं। सच्चाई का साथ कभी मत छोड़ना चाहिए। इस दौरान यजमान राजेंद्र प्रसाद सिंह, मुकेश, अरविंद व अन्य उपस्थित रहे।