अंबेडकरनगर। जिले में पारिवारिक रिश्तों की मर्यादा लगातार कमजोर पड़ती जा रही है। संयम और संवाद की जगह क्रोध ने ले ली है। हालात यह हैं कि मामूली विवाद अब जानलेवा वारदात में बदल रहे हैं।
बीते एक साल में जिले में छोटी-छोटी बातों पर अपनों द्वारा अपनों पर हमला और हत्या के कई सनसनीखेज मामले सामने आ चुके हैं। लगातार सामने आ रही ये घटनाएं बताती हैं कि रिश्तों में सहनशीलता खत्म होती जा रही है। यदि समय रहते मानसिकता में सुधार, संवाद की संस्कृति और कानून का भय मजबूत नहीं किया गया, तो पारिवारिक हिंसा और भयावह रूप ले सकती है।
नशे में पिता ने बेटे का ही कर दिया कत्ल
जैतपुर के चौदहप्रास निवासी सिधारी ने नशे में अपने बेटे पवन की कुदाल के बेत से पीट-पीटकर 22 अगस्त 2025 को हत्या कर दी थी। सिधारी पानीपत में रह रहे अपने बेटे अरुण, नीरज व लक्ष्मण को घर बुलाना चाहते थे। पवन की पत्नी पानीपत में रह रहे उसके भाई के साथ चली गई थी। इसी के चलते पवन अपने पिता को उनके भाई को गांव न बुलाने की बात पर अड़ा था।
-
पत्नी ने ही पति की गला घोंटकर कर दी थी हत्या
टांडा के रसूलपुर-मुबारकपुर निवासी अनीस अहमद की हत्या 14 सितंबर की रात उसकी पत्नी हिना फातिमा ने अपने दो भाईयों शाहिद और आरिफ के साथ मिलकर गला घोंटकर हत्या कर दी थी। नशे की लत में आए दिन अनीस पत्नी को मारता पीटता था।
खुली बातचीत हिंसा रोकने में कारगर
तेजी से बदलती जीवनशैली, तनाव और धैर्य की कमी ने पारिवारिक संतुलन बिगाड़ा है। संवाद खत्म होते ही आक्रोश हावी होता है। मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक नियंत्रण और परिवार में खुली बातचीत ही हिंसा रोकने का कारगर उपाय हैं।
डॉ. अब्दुल हमीद, मनोरोग चिकित्सक, जिला चिकित्सालय
-
समाज में विधिक समझ होना जरूरी
छोटे विवादों में हिंसा गंभीर अपराध है। कानून बेहद सख्त है और रिश्तेदार होने से कोई छूट नहीं मिलती। जागरूकता, समझ और मध्यस्थता से घटनाएं रोकी जा सकती हैं, यह समाज को समझना होगा।
अरविंद कुमार त्रिपाठी, सचिव बार एसोसिएशन अकबरपुर
अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी
पुलिस कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्ती बरत रही है। अपराध जिसके द्वारा भी किया जाएगा, उसे सख्त सजा दिलाई जाएगी।
- अभिजीत आर शंकर, एसपी