आलापुर, (अंबेडकरनगर)। जहांगीरगंज के विश्वनाथपुर-नरियांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन मंगलवार को प्रवाचक विमल कृष्ण शास्त्री ने महर्षि वेदव्यास के प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने श्रोताओं को भक्ति, ज्ञान और आत्ममंथन का गूढ़ संदेश दिया।
प्रवाचक ने समझाया कि केवल ज्ञान या कर्म से जीवन पूर्ण नहीं होता, उसमें भक्ति का समावेश आवश्यक है। देवर्षि नारद ने व्यास जी की उदासी का कारण पूछते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की निष्काम भक्ति और उनकी लीलाओं का गान किए बिना आत्मिक संतोष संभव नहीं है। भक्ति रहित ज्ञान समाज को सही दिशा नहीं दे पाता, यही कारण है कि आज का मानव मानसिक अशांति से जूझ रहा है। नारद जी के उपदेश से प्रेरित होकर व्यासजी ने भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप का साक्षात्कार किया और श्रीमद्भागवत महापुराण की रचना का संकल्प लिया।
प्रवाचक ने कहा कि भागवत ग्रंथ मानव जीवन के लिए अमृत समान है, जो समाज को प्रेम, करुणा और सेवा का मार्ग दिखाता है। भागवत कथा जैसे आयोजन विघटित होते समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं और भक्ति से विचारों की शुद्धि संभव है। कथा के दौरान श्रोता भाव-विभोर होकर प्रवचन सुनते रहे, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया।