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Ambedkar Nagar News: नौ से शुरू होगा हजरत मखदूम अशरफ का सालाना उर्स

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सुल्तान सैयद मखदूम अशरफ का रौजा-ए-मुबारक। संवाद
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अंबेडकरनगर। विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हजरत सुल्तान सैयद मखदूम अशरफ जहांगीर सिमनानी का आठ दिवसीय सालाना उर्स इस्लामी कैलेंडर के अनुसार 23 मुहर्रम (9 जुलाई) से शुरू होकर 16 जुलाई तक चलेगा। उर्स में देश-विदेश से लाखों जायरीन अशरफपुर किछौछा स्थित दरगाह पहुंचकर चादर और अकीदत के फूल पेश करेंगे तथा मुल्क में अमन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगेंगे। उर्स को लेकर प्रशासन और दरगाह इंतजामिया कमेटी ने तैयारियां तेज कर दी हैं।
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जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर और बसखारी से लगभग दो किलोमीटर उत्तर स्थित यह दरगाह देश के प्रमुख रूहानी केंद्रों में शुमार है। हजरत मखदूम अशरफ जहांगीर सिमनानी का जन्म 707 हिजरी (1286 ई.) में ईरान के सिमनान नगर में हुआ था। पिता के इंतकाल के बाद उन्होंने कुछ समय तक राजगद्दी संभाली लेकिन सांसारिक वैभव त्यागकर शासन अपने छोटे भाई को सौंप दिया और आध्यात्मिक जीवन अपना लिया। समरकंद, मुल्तान, दिल्ली, बिहार, बंगाल और जौनपुर की यात्रा करते हुए वह किछौछा पहुंचे, जहां उन्होंने प्रेम, मानव सेवा, सद्भाव और सूफी विचारधारा का संदेश दिया। 808 हिजरी (1387 ई.) में उनके विसाल के बाद भी उनकी शिक्षाएं आज करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं।

परचम कुशाई से होगा उर्स का आगाज
उर्स का शुभारंभ 23 मुहर्रम (9 जुलाई) को मलंग गेट से खानवाद-ए-अशरफिया की ओर से परचम कुशाई की रस्म के साथ होगा। इसके बाद जुलूस दरगाह पहुंचकर चादरपोशी और फूल पेश करेगा तथा देश में अमन-चैन और खुशहाली की दुआ की जाएगी। उर्स के दौरान विभिन्न खानकाहों के सज्जादानशीन पारंपरिक रस्में अदा करेंगे। तैयारियों के लिए सोमवार को डीएम ईशा प्रिया व एसपी प्राची सिंह बैठक भी करेंगी। उर्स का सबसे महत्वपूर्ण आयोजन 28 मुहर्रम को होने वाली ऐतिहासिक खिरकापोशी की रस्म होगी। इस अवसर पर लाखों जायरीन खिरका मुबारक और छड़ी मुबारक के दीदार कर मन्नतें मांगेंगे। यह रस्म उर्स का सबसे बड़ा आकर्षण मानी जाती है।
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नीर शरीफ के जल में अटूट आस्था
दरगाह परिसर स्थित नीर शरीफ के जल के प्रति भी श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई दुआ इंसान को मानसिक शांति प्रदान करती है और जीवन की कठिनाइयों से उबरने का संबल देती है। यही कारण है कि हर वर्ष लाखों जायरीन कई दिनों तक दरगाह में ठहरकर इबादत और हाजिरी लगाते हैं।
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