साढ़े चार करोड़ की लागत से लगने वाली हाईटेक मशीन से टांडा के वस्त्र उद्योग को एक नयी उड़ान मिलेगी। एक जनपद, एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत टांडा में लगभग साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत से इस विशेष प्रोजेक्ट की स्थापना की गई है। इसमें अत्याधुनिक फ्लैक्सिबल रैपियर मशीन के साथ ही वॉशिंग मशीन भी लगी है।
जिले का कोई भी बुनकर अपना धागा लेकर इस प्रोजेक्ट के तहत लगी हाईटेक मशीन से बेहतर गुणवत्ता का कपड़ा तैयार कर सकेगा। इसके एवज में उसे बस मामूली शुल्क की अदायगी ही करना होगी। इसका लाभ जिले के हजारों ऐसे बुनकर उठा सकते हैं, जो लाखों रुपये खर्च कर मशीन नहीं खरीद सकते हैं।
कपड़ा उद्योग के लिए पहचाने जाने वाले अंबेडकरनगर जिले का चयन बीते दिनों ओडीओपी योजना के तहत वस्त्र उत्पाद के लिए किया गया था। जिले में टांडा, अकबरपुर, जलालपुर, हंसवर, इल्तिफातगंज, बसखारी, किछौछा, मिझौड़ा, जहांगीरगंज, आदि क्षेत्रों में लगभग सवा लाख लोग पॉवरलूम के कार्य से जुड़े हैं और तरह-तरह के कपड़े तैयार करने का कार्य करते हैं।
देसी किस्म के इन पावरलूम पर तैयार कपड़े से बनने वाली लुंगी, गमछा, टेरीकाट व काटन शर्ट की गुणवत्ता और फिनिशिंग भी बेहतर नही हो पाती है। इस कारण बुनकरों को उनकी मेहनत की पूरी कीमत भी नहीं मिल पाती है।
टांडा में कुछ ही ऐसे पावरलूम संचालक हैं, जिन्होंने उत्पादन के लिए बेहतर किस्म की मशीनें लगा रखी हैं। बीते दो दशक के दौरान मंदी के दौर से गुजर रहे जिले के वस्त्र उद्योग को अलग अलग कारणों से काफी झटका भी लगा है। इसमें बिजली संकट से लेकर कच्ची सामग्री के बतौर धागों की कमी विशेषतौर पर है।
आठ घंटे में तैयार होगा तीन हजार मीटर बेहतर कपड़ा
उद्योग विभाग ने जिले के वस्त्र उद्योग को बेहतर बनाने के लिए सकारात्मक पहल की है। इसके तहत 25 व्यक्तियों के एक समूह द्वारा स्थापित टांडा टेक्सटाइल एसोसिएशन को 4.59 करोड़ की सहायता अत्याधुनिक फ्लैक्सिबल रैपियर मशीन के साथ ही वॉशिंग मशीन खरीदने को प्रदान की है। इसमें सरकार की तरफ से 90 प्रतिशत का अनुदान शामिल है। एक बीघा से अधिक क्षेत्रफल में लगी इन अत्याधुनिक मशीनों से हर दिन बेहतर गुणवत्ता का औसतन तीन हजार मीटर कपड़ा बनाया जा रहा है। समूह के संचालक कासिम बताते हैं कि मशीन अभी लगभग आठ घंटे ही चल रही है। फिलहाल समिति से जुड़े करीब आधा दर्जन सदस्यों द्वारा ही अपना धागा देकर यहां कपड़ा तैयार कराया जा रहा है। इस मशीन से कम समय में ज्यादा उत्पादन होने का लाभ सीधे तौर पर बुनकरों को मिल रहा है।
बुनकरों के लिए संजीवनी बनेगा प्रोजेक्ट
टांडा टेक्सटाइल एसोसिएशन के संचालक कासिम अंसारी ने बताया कि यह पूरा प्रोजेक्ट जिले के बुनकरों के लिए संजीवनी साबित होगा। दो माह पहले शुरू हुए इस प्रोजेक्ट से जुड़ कर अलग अलग क्षेत्रों में संचालित सवा लाख पॉवरलूम से जुड़े बुनकर यहां आकर बेहतर गुणवत्ता के कपड़े का निर्माण कर सकते हैं। अत्याधुनिक रैपियर मशीन लगाने से इसमें चिप के जरिए किसी भी डिजाइन का कपड़ा तैयार किया जा सकता है। बस इसके लिए उसी डिजाइन से जुड़े धागे का रोल चाहिए होगा। उन्होंने बताया कि कपड़ा बनाने के अलावा यहां पर बुनकरों द्वारा कच्चा धागा लाए जाने पर उसे उनके पावरलूम में लगाने के लिए धागे का विशेष रोल बनाकर देने की सुविधा भी होगी।
बेहतर गुणवत्ता के तैयार होंगे कपड़े
जिला उपायुक्त उद्योग आशुतोष सहाय पाठक ने बताया कि आम बुनकरों के लिए यह योजना काफी फायदेमंद साबित होगी। इसके माध्यम से छोटा बुनकर भी बिना महंगी मशीन लगाए सिर्फ धागा की उपलब्धता के आधार पर बेहतर गुणवत्ता के कपड़े का निर्माण कर सकता है। इसके लिए उसे खुद के धागे के साथ ही मामूली शुल्क ही चुकाना होगा। इस संबंध में डीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी द्वारा 100 ग्राम 44 इंच के प्लेन कपड़े के निर्माण के लिए 4.50 रुपया, 90 ग्राम 36 इंच डावी और चेक ड्रेस निर्माण के लिए 6.50 रुपया तथा 90 ग्राम 36 इंच डावी और चेकदार कपड़े के लिए 7.50 रुपये शुल्क का भुगतान ही करना होगा।