लगातार बदल रहे मौसम और बारिश के चलते बिलों से सांप बाहर आ रहे हैं। इससे सर्पदंश की घटनाएं भी तेजी से बढ़ी हैं। जिला मुख्यालय पर ही औसतन प्रतिदिन 8 से 10 मरीज पहुंच रहे हैं। तमाम लोग झाडफ़ूंक के चक्कर में पड़कर अस्पताल नहीं पहुच पाते। क्यों कि ग्रामीण क्षेत्रों में झाड़फूंक पर विश्वास करने वाले लोग ज्यादा हैं।
अस्पतालों में एंटी स्नैक वैक्सीन की कोई कमी नहीं है। यहां पहुंचने वाले सभी मरीजों को यह वैक्सीन आसानी से उपलब्ध भी हो रही है। इसके बावजूद सर्पदंश के बाद तत्काल जिला चिकित्सालय पहुंचने की बजाए तमाम लोग झाडफ़ूंक व देशी इलाज शुुरू कर देते हैं।
इसमें समय व्यतीत होने के बाद भी जब कोई फायदा नहीं मिलता तब लोग चिकित्सालयों की तरफ रुख करते हैं। ऐसे में कई बार विलंब होने की स्थिति में मौत भी हो जाती है। चिकित्सकों के मुताबिक पर्याप्त सावधानी बरतने से सर्पदंश के बावजूद व्यक्ति सामान्य रह सकता है।
डा. आरसी गुप्त, चिकित्सक ऐसे मामलों में तमाम मौतें सिर्फ घबराहट की वजह से हो जाती हैं। जिस व्यक्ति को सांप ने डंसा है उसे ढांढस बंधाने के साथ ही तत्काल इलाज कराना चाहिए। चिकित्सक डा. विजय तिवारी ने बताया कि सांप काटने के बाद साफ ब्लेड से हल्का चीरा लगाकर थोड़ा रक्त निकाल देना चाहिए। इसके अलावा कटे हुए स्थान से थोड़ा आगे किसी चीज से कसकर बांध देना चाहिए।