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गन्ने की फसल सूखने से बढ़ी किसानों की मुश्किल

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कटेहरी। क्षेत्र के गन्ना किसानों की चिंताएं बढ़ गई है। रोग लगने से गन्ने की फसल सूखने की कगार पर है। किसान फसल बचाने की तमाम जुगत लगा रहे, अभी तक सफलता नहीं मिल रही है। जिससे उनकी उम्मीदों पर झटका लगा है। किसानों ने मांग की कि बर्बाद हो चुकी फसलों का आंकलन कराकर उन्हें आर्थिक मदद दिलाई जाए।
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क्षेत्र के किसानों की समस्याएं खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। एक तरफ जहां भारी बारिश से किसानों की पिपरमिंट की फसल बर्बाद हो गई। वहीं अब वहीं गन्ने की फसल में बीमारी लगने से उनकी उम्मीदों को झटका लगा है। दरअसल, तमाम किसानों का गन्ना इन दिनों रोग की चपेट में है। रोग के प्रभाव से गन्ने की फसल धीरे-धीरे सूख रही है। हालांकि किसान इस बीमारी से निजात पाने के लिए कीटनाशक दवाओं का छिड़काव भी कर रहे, लेकिन इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा। इस स्थिति में अब किसानों के समक्ष फसल को बचाने की चुनौती है। वहीं फसल बचाने की आस छोड़ चुके तमाम किसान फसल काटकर पशुओं को खिलाने में ही भलाई समझ रहे।
किसान विजय चौधरी, रामजीत यादव, त्रिभुवन वर्मा, रामदीन व रामनाथ आदि ने बताया कि अचानक गन्ने की फसल सूखने से मुश्किल पैदा हो गई हैं। तमाम कोशिशों के बावजूद फसल को बचाने में सफलता नहीं मिल रही है। यदि फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई तो उन्हें लाखों रुपये का नुकसान झेलना पड़ेगा। किसान रमेश, इंद्रजीत व भोला ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि पिपरमिंट में घाटा झेलने के बाद अब गन्ने की फसल से कुछ हद तक भरपाई हो जाएगी, लेकिन गन्ने की फसल भी बर्बादी की कगार पर है। किसानों का कहना है कि शासन-प्रशासन यदि उन्हें खराब हो चुकी फसलों की भरपाई के तौर पर आर्थिक मदद दे दें तो कुछ हद तक उनकी समस्याएं समाप्त हो सकती हैं। किसानों ने सरकार से मांग की कि गन्ना किसानों की सर्वे कराकर उन्हें उचित क्षतिपूर्ति दिलाई जाएं।
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