राजेसुल्तानपुर (अंबेडकरनगर)। क्षेत्र के ब्रह्मचारी बाबा के स्थान मुमुक्षु आश्रम इंदौरपुर घिन्हापुर में श्रीमद्भागवत महापुराण अष्टोत्तरशत पारायण महायज्ञ व श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है।
शनिवार को कथा प्रवाचक डॉ. संत शरण त्रिपाठी ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान के प्रत्येक चरित्र में मानव जीवन को दिशा देने वाला गूढ़ संदेश छिपा है। द्वारिका में समुद्र प्रवेश के पश्चात भगवान बद्रीनाथ व बज्रनाथ ने राजा परीक्षित की सहायता से ब्रजभूमि का पुनः विस्तार कराया और भगवान के लीला स्थलों का सौंदर्य पुनः स्थापित किया। प्रवाचक ने बताया कि जब माता सुरुचि ने ध्रुव को पिता की गोद से उतार दिया, तब बालक ध्रुव अपमान की वेदना लेकर वन को चले गए। मार्ग में देवर्षि नारद ने उन्हें वासुदेव मंत्र की दीक्षा दी। कठोर तप से प्रसन्न होकर भगवान ने ध्रुव को ध्रुव लोक का वरदान दिया। जड़ भरत ने बताया कि जब तक मनुष्य किसी संत के चरणों की रज से अपने जीवन को पवित्र नहीं करता, तब तक शुभ प्रवृत्तियां स्थायी नहीं होतीं। उन्होंने कहा कि सत्संग से ही मनुष्य के जीवन में मति (विवेक), कीर्ति (यश), गति (उन्नति), विभूति (संपन्नता) और भलाई (सदाचार) का विकास होता है। महायज्ञ स्थल पर 108 विद्वान ब्राह्मणों की ओर से श्रीमद्भागवत महापुराण का अष्टोत्तरशत पारायण पाठ निरंतर जारी है। पीठाधीश्वर सतव्रत ब्रह्मचारी ने बताया कि मौसम के कारण प्रारंभ में कुछ व्यवधान अवश्य आए, परंतु नारायण की कृपा से सब कुछ सुचारु रूप से संपन्न हो रहा है।