शासन से अब तक ड्रेस के लिए संबंधित विभाग को जरूरी धनराशि नहीं प्राप्त हो सकी है। विभाग के अनुसार सभी छात्र छात्राओं को निशुल्क ड्रेस उपलब्ध कराने के लिए शासन से आठ करोड़ 76 लाख 24 हजार 400 रुपये की मांग की गई है। शासन से अब तक धनराशि न पहुंचने के चलते समय पर ड्रेस मिलने की संभावना नहीं है।
परिषदीय विद्यालयों में अध्यनरत छात्र छात्राओं को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा शासन प्रशासन तो बढ़-चढ़कर करता है, लेकिन उसे अमली जामा पहनाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता।
परिषदीय विद्यालयों की तरफ छात्र छात्राओं को आकर्षित करने के लिए वैसे तो तमाम योजनाओं का संचालन किया जा रहा है, लेकिन इन योजनाओं का समुचित लाभ दिलाने के लिए गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
परिषदीय विद्यालयों में अध्यनरत छात्र छात्राओं को योजनाओं का समुचित लाभ दिलाने को लेकर शासन प्रशासन कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नया शिक्षासत्र प्रारंभ हुए दो माह से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक छात्र-छात्राओं को नई ड्रेस नहीं मिल सकी है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल एक हजार 872 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें एक हजार 352 प्राथमिक व 520 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। मार्च माह की उपस्थिति के आधार पर इन विद्यालयों में कुल दो लाख 19 हजार 61 छात्र छात्राएं अध्यनरत हैं।
इन छात्र छात्राओं को दो दो सेट निशुल्क ड्रेस उपलब्ध कराने के लिए कुल आठ करोड़ 76 लाख 24 हजार 400 रुपये की आवश्यकता है। विभागीय अधिकारियों द्वारा शासन से धनराशि की मांग के बाद अब तक विभाग को धनराशि नहीं मिल उपलब्ध हो सकी है। ऐसे में जुलाई में स्कूल खुलने पर छात्र छात्राओं को फटे पुराने ड्रेस में विद्यालय जाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।