अंबेडकरनगर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का संयोग इस बार दो दिन पड़ रहा है। ऐसे में श्रद्धालु दो दिन व्रत रखकर पूजन कर सकते हैं। फिलहाल 11 अगस्त को गृहस्थ आश्रम में जीवनयापन करने वाले भक्तों को व्रत रखकर पूजन करना उचित रहेगा। 12 अगस्त को दोपहर तक अष्टमी रहेगी। इस दिन वैष्णव संप्रदाय से जुड़े साधु-संत व्रत रखकर पूजन कर सकते हैं। ये जानकारी आचार्य आशुतोष शुक्ल ने दी।
आचार्य ने बताया कि शास्त्रों में इस तरह की उलझनों के लिए एक आसान उपाय बताया गया है। गृहस्थों को उस दिन व्रत रखना चाहिए जिस रात को अष्टमी तिथि लग रही है। पंचांग के अनुसार 11 अगस्त दिन मंगलवार को गृहस्थ आश्रम के लोगों को जन्माष्टमी पर्व मनाना सही रहेगा। 11 अगस्त की रात को अष्टमी तिथि लग रही है। गृहस्थ आश्रम से जुड़े भक्त चंद्रमा को अर्घ्य देकर, दान व कीर्तन करें और कृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाएं। वैष्णव संप्रदाय से जुड़े साधु-संत 12 अगस्त को व्रत रख सकते हैं। 12 अगस्त को सुबह 11 बजकर 17 मिनट तक अष्टमी तिथि रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी। इस दिन अष्टमी और नवमी दोनों तिथि रहेंगी।
दरअसल श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की दो अलग-अलग तिथियां हैं। भाद्रपद की षष्ठी को बलराम जी का और अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में श्रीकृष्ण जी का जन्म हुआ था। इस माह में भगवान विष्णु की विशेष पूजा करनी चाहिए। इस दिन आराधना करने से पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। इस बार जन्माष्टमी पर कृतिका नक्षत्र रहेगा। उसके बाद रोहिणी नक्षत्र रहेगा। पूजा का शुभ समय रात्रि 12 बजकर पांच मिनट से रात्रि 12 बजकर 47 मिनट तक है। समस्त मनोकामना की पूर्ति के लिए भगवान कृष्ण को दक्षिणावर्ती शंख से दुग्ध अभिषेक कर पंचामृत अर्पण करना चाहिए। माखन व मिश्री का भोग लगाना चाहिए।