जलालपुर (अंबेडकरनगर)। रफीगंज बाजार में बुधवार को समाज में संयुक्त परिवार भूमिका पर गोष्ठी हुई। मुख्य वक्ता डॉ श्यामलाल ने कहा कि पहले व्यक्ति का उद्देश्य परिवार की सुख समृद्धि होता था। आज व्यक्ति स्वयं का हित सोचता है। वह अधिक उपयोगितावादी और सुखवादी हो गया है। इस कारण संयुक्त परिवार टूट रहे हैं।
डॉ. बुसरा अंजुम ने कहा कि विवाह स्वरूप में परिवर्तन से भी संयुक्त परिवार में सामंजस्य कम हुआ है। प्रेम विवाह और अंतरजातीय विवाह बढ़ रहे हैं। परिवार एक परंपरागत संस्था है। वह परिवर्तन जल्दी स्वीकार नहीं करती। इसलिये विवाह के इन रूपों को बहुत ही कम स्वीकारोक्ति मिल पा रही है।
वक्ताओं ने कहा कि नारी की स्थिति भी बदल रही है। घर में बच्चा आया के हाथों में है। उसे मां-बाप का प्यार नहीं मिल पाता। दादा-दादी की नैतिक कहनियां अब नहीं सुनाई देतीं। घर से अंत्याक्षरी जैसे खेल समाप्त हो चुके हैं। व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर अपना आभासी समाज बना रखा है। यह समाज घर तक आ रहा है।
वक्ताओं ने कहा कि परिवार व समाज को एकजुट रखने के लिए सभी को स्वार्थरहित विचारों को अपनाना होगा। एक-दूसरे की मदद करने के साथ उनके सुख-दुख में भागीदारी करनी होगी। इस मौके पर दीप नारायण मिश्र, महेंद्र सिंह, इम्तियाज, डॉ. सत्यप्रकाश, डॉ. राधेश्याम यादव व डॉ. गजनफर आदि मौजूद रहे।