आधा दर्जन से अधिक ट्रेनें विलंब से चलीं तो वहीं राज्य परिवहन निगम की बसों के लिए भी यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ा। इन सबके बीच अकबरपुर बस डिपो में मौजूद 46 बसों में 20 बसों पर फाग लाइट नहीं सकी है, जबकि 40 बसों में रिफ्लेक्टर नहीं लगा है।
दिसंबर के प्रथम सप्ताह से ही ठंड ने रंग दिखाना शुरू कर दिया है। रविवार देर रात से ही कोहरे ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था। रात बढने के साथ ही कोहरे का प्रकोप बढ़ता गया। फैजाबाद मार्ग पर जहां तहां ट्रक व ऐसे अन्य वाहन खड़े हो गए। मौसम खराब होने से वाहन चलाने में खासी असुविधा हुई।
अकबरपुर नगर के निकट पहुंचने के बाद कई चालकों ने अपने ट्रक किनारे खड़े कर दिए। यही स्थिति बसखारी मार्ग, मालीपुर तथा दोस्तपुर व पहितीपुर मार्ग की भी रही। रात में परिवहन निगम की बसें तो जरूर चलीं, लेकिन उनमें से कई में फाग लाइट न होने की वजह से वे सिर्फ रेंगती हुई चलती नजर आईं।
अन्नावां के निकट एक कार व ट्रैक्टर की मामूली भिड़ंत भी रात दो बजे करीब हो गई, लेकिन उसमें संयोग से किसी को चोट नहीं आई। सोमवार सुबह भी घना कोहरा छाया रहा। इससे सबसे ज्यादा मुश्किल स्कूल जाने वाले छात्र छात्राओं को हुई। ठंड के चलते उन्हें अतिरिक्त गर्म वस्त्र पहनकर स्कूल जाना पड़ा।
कोहरे का असर सामान्य दिनचर्या पर भी खूब पड़ा। सुबह नौ बजे से खुलने वाली दुकानों के शटर प्रात: दस बजे करीब उठ सके। अधिकांश दुकानों पर दोपहर तक सन्नाट रहा। कोहरे का असर रेल व बस सेवाओं पर भी पड़ा।
राज्य परिवहन निगम की बसें भी लंबे अंतरताल के बाद अकबरपुर डिपो पर पहुंचती रहीं, जिससे यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ा। इस बीच पूर्वाह्न 11 बजे तक पूरा जिला घने कोहरे की चपेट में रहा। दोपहर बाद कुछ देर के लिए धूप निकली, लेकिन शाम होते होते एक बार फिर से कोहरा गिरने लगा।
नहीं है कोई तैयारी
घने कोहरे ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है, लेकिन किसी दुर्घटना से बचने के लिए परिवहन विभाग कोई ठोस कदम नहीं उठा सका है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अकबरपुर रोडवेज डिपो में कुल 46 बसें हैं। इनमें से 20 बसें ऐसी हैं, जिसमें फागिंग लाइट नहीं लग सकी है। जिनमें लगी भी हैं, उनमें अधिकांश में लाइट क्षतिग्रस्त है। इसके अलावा 40 बसों में रिफ्लेक्टर नहीं लगाया जा सका है। इनमें से कुछ में विगत वर्ष का लगा हुआ है, लेकिन वह पूरी तरह खराब हो चुका है। ऐसे में मौजूदा समय में उसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है।