डेंगू की चपेट में आने से शुक्रवार की रात एक सिपाही की मौत हो गई। लखनऊ में वायरलेस सेल में तैनात सिपाही का इलाज एक निजी अस्पताल में चल रहा था। 15 सितंबर को तेज बुखार के बाद हुई जांच में डेंगू की पुष्टि हुई थी।
जिसके बाद सिपाही को परिवारीजनों ने लखनऊ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। शनिवार को सिपाही का शव अकबरपुर थाना अंतर्गत बसोहड़ी पहुंचा। टांडा के महादेवा घाट पर सिपाही का अंतिम संस्कार किया गया।
सम्मनपुर थाना अंतर्गत बसोहड़ी गांव निवासी प्रियंक वर्मा (32) पुत्र ओमप्रकाश इन दिनों लखनऊ में वायरलेस सेल में सिपाही थे। परिवारीजनों के अनुसार 15 सितंबर को प्रियंक को तेज बुखार आया। इस पर स्थानीय चिकित्सकों से इलाज कराया पर तबियत में सुधार नहीं हुआ।
इसके बाद 16 अगस्त को चिकित्सकों की सलाह पर जांच कराई तो इसमें डेंगू होने की बात सामने आई। इसके बाद प्रियंक को लखनऊ में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान शुक्रवार देर शाम उसकी मौत हो गई। शनिवार को प्रियंक का शव गांव पहुंचा। बाद में टांडा के महादेवा घाट पर सिपाही का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
जिले में डेंगू का प्रकोप जलालपुर, भीटी व टांडा तहसील क्षेत्रों में भी दिखा है। बीते दिनों ही महरुआ थाना क्षेत्र में एक बालक सनी की डेंगू की चपेट में आने के बाद लखनऊ ट्रॉमा सेंटर में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इसके अलावा जलालपुर में बीते दिनों जांच में डेंगू से पीड़ित दो मरीज सामने आए थे, जिन्हें इलाज के लिए लखनऊ ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था।
इसी तहसील क्षेत्र में डेंगू से दो की मौत भी हुई थी। डेंगू से पीड़ित मरीज की जिले में इलाज की कोई सुविधा नहीं है। ऐसे में यदि किसी में डेंगू के लक्षण सामने आते हैं, तो उन्हें लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। इससे अक्सर मरीजों व उनके तीमारदारों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। जिला अस्पताल में मात्र जांच की ही सुविधा है।
सीएमओ डॉ. जीआर चंद्रा ने बताया कि जिला अस्पताल में डेंगू की जांच की सुविधा है, लेकिन इलाज की नहीं। इलाज के लिए मरीज को निकटवर्ती जिलों या फिर लखनऊ रेफर किया जाता है।