हत्या के एक मामले में अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या दो शंकरलाल ने छह अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इनमें पांच सगे भाई हैं। सभी पर दस-दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड न देने पर एक-एक वर्ष के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतने का आदेश सुनाया गया है।
घटनाक्रम छह वर्ष पुराना है। 9 फरवरी 2010 को आलापुर थाने में दर्ज कराई प्राथमिकी के जरिये भगवानपुर मंझरिया निवासिनी वादिनी बहबना ने कहा था कि उनके पति रामआसरे सुबह साढ़े दस बजे एक जरूरी काम से साइकिल से थकिया गांव जा रहे थे।
वे गांव के ही नंदलाल के घर के सामने पहुंचे थे कि तभी रंजिश को लेकर नंदलाल के अलावा उनके सगे भाई दीपचंद, संतलाल, लालचंद व शंकर के साथ एक अन्य मयाराम ने रोक लिया और लाठी-डंडे व धारदार हथियार से मारापीटा।
शोर सुनकर वह तथा उनकी पुत्री और अन्य ग्रामीण पहुंचे तो पति की हालत गंभीर हो चुकी थी। सरकारी अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। पुलिस ने सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर उनका चालान कर दिया था। सभी आरोपी इन दिनों जमानत पर रिहा चल रहे थे। इस बीच यह मामला सत्र परीक्षण के लिए पेश हुआ।
मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या दो शंकरलाल ने सभी छह अभियुक्तों को पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोषी पाया। उन्होंने सभी आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाने के साथ ही दस-दस हजार का अर्थदंड भी लगाया। यह भी आदेश दिया कि वादिनी को प्रतिकर के रूप में प्रत्येक अभियुक्त से दस-दस हजार का भुगतान भी कराया जाए।