जापानी इंसेफ्लाइटिस व एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम या मस्तिष्क ज्वर जैसी जानलेवा बीमारी से बचने के लिए जिले में 10 वर्ष बाद विशेष अभियान शुरू हुआ है। वर्ष 2006-07 में चले इस अभियान में लगभग 80 हजार लोगों का टीकाकरण किया गया था। इस बार यह लक्ष्य बढ़ाकर 99 हजार कर दिया गया है।
जिला अस्पताल, जलालपुर महिला अस्पताल के अलावा 10 सीएचसी व 24 पीएचसी पर विशेष अभियान के तहत शुक्रवार से टीकाकरण शुरू हुआ है। इसमें छोटे बच्चों पर असर सबसे ज्यादा होता है। इसलिए राज्य सरकार ने पूरी गंभीरता के साथ अभियान चलाने का निर्देश दिया है।
जिले में इस रोग से मौत का कोई रिकार्ड तो विभाग के पास नहीं है लेकिन तेज बुखार व दर्द के साथ पहले 10 से अधिक मरीजों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग ने लगभग एक दशक बाद शुरू हुए इस वृहद टीकाकरण अभियान को सफल बनाने के लिए समुचित प्रबंधों का दावा किया है। प्रचार-प्रसार के अभाव के चलते जेई टीकाकरण अभियान के पहले दिन गुरुवार को कम बच्चे पहुंचे।
मात्र 18 बच्चों का ही टीकाकरण हुआ। ऐसे में ज्यादातर समय सन्नाटा ही पसरा रहा। अभियान का शुभारंभ करते हुए सीएमएस डॉ. केएस पांडेय ने कहा कि एक से 15 वर्ष तक के बच्चों को यह टीका लगाया जाता है। मस्तिष्क ज्वर जैसी जानलेवा बीमारी से बचने के लिए टीका अवश्य लगवाएं।
टीकाकरण प्रभारी अनंत चतुर्वेदी ने बताया कि पहले दिन कुल 18 बच्चों को टीका लगाया गया। इस दौरान रेनू, नरेंद्र वर्मा, राकेश, सुशील आदि मौजूद रहे। जेई टीकाकरण की शुरुआत सीओ राजेंद्र सिंह ने करते हुए लोगों से आह्वान किया कि जापानी इंसेफ्लाइटिस व मस्तिष्क ज्वर से बचाव के लिए जेई टीका लगवाना आवश्यक है।
टीकाकरण अभियान को सफल बनाने के लिए सभी के सहयोग की आवश्यकता है। महिला अस्पताल प्रभारी डॉ. मोहसिना खातून ने बताया कि गुरुवार को पहले दिन कुल 12 बच्चों का टीकाकरण हुआ। इस दौरान नगपुर सीएचसी प्रभारी डॉ. अतीक आलम, बाल विकास परियोजना अधिकारी बलराम सिंह, स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी डॉ. अनिल , रविश्याम आदि मौजूद रहे।
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आरसी गुप्ता ने कहा कि जापानी इंसेफ्लाइटिस व मस्तिष्क ज्वर के मुख्य लक्ष्य शरीर में अकड़न, जोड़ों में दर्द, आंखें लाल होना व तेज बुखार होना है। जब यह रोग चरम पर पहुंचता है तो मुंह से झाग निकलना शुरू हो जाता है। शुरुआती लक्षण दिखने के साथ ही मरीज को तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सक को दिखाना चाहिए।
तनिक सी लापरवाही का बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। मस्तिष्क ज्वर जैसी जानलेवा बीमारी से बचने के लिए जागरूकता की अधिक आवश्यकता है। घर व आसपास के क्षेत्र में विशेष साफ-सफाई रखें। घर में गंदा पानी एकत्र न होने दें। मच्छरदानी लगाकर सोएं। सोते समय शरीर ढका रहना चाहिए।