आलापुर (अंबेडकरनगर)। क्षेत्र के मसेना मिर्जापुर के शांति विहार कॉलोनी में चातुर्मास श्रीराम कथा का आयोजन किया जा रहा है। प्रवाचक श्रीनिवास दास वेदांती ने रविवार को सीता स्वयंवर के प्रसंगों का वर्णन किया। प्रवाचक ने कहा कि हर किसी के लिए श्रीराम का जीवन आदर्श है।
प्रवाचक बताया कि महाराजा दशरथ अपने पुत्रों सहित जनकपुर पहुंचे थे। वहां महाराजा जनक ने अगवानी कर उनका स्वागत किया। इस अवसर पर महर्षि विश्वामित्र ने चारों राजकुमारों को अपने पिता से परिचित कराया। ब्रह्माजी ने स्वयं विवाह का मुहूर्त निकाला और यह संदेश जनकपुरी भेजा। निर्धारित तिथि मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष पंचमी को विवाह संपन्न हुआ। विवाह का दिन अत्यंत दिव्य रहा। जब श्रीराम दूल्हे के रूप में सुसज्जित हुए तो स्वयं कामदेव घोड़े का रूप धारण कर बरात में सम्मिलित हुए। समस्त लोक इस महोत्सव के सहभागी बने। प्रवाचक ने कहा कि श्रीराम का जीवन हर युग के लिए आदर्श है। विवाह प्रसंग से हमें संयम, धर्म और आदर्श परिवार की परिभाषा समझने की प्रेरणा मिलती है। इसमें सादगी, परंपराओं के प्रति सम्मान, पारिवारिक संबंधों की महत्ता, विनम्रता और मर्यादा का संदेश समाहित है। श्रीराम के जीवन से हमें यह सीख मिलती है कि सादगी में भी महानता है और संस्कृति का पालन ही समाज को दिशा देता है।