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पर्यटन के नक्शे पर नहीं उभर सका श्रवण धाम

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अंबेडकरनगर में उपेक्षा का शिकार है यह पवित्र श्रवणक्षेत्र धाम। - फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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अंबेडकरनगर। पवित्र श्रवण क्षेत्र धाम को पर्यटक स्थल तो घोषित कर दिया गया, लेकिन कई दशक बीत जाने के बाद भी उसे पर्यटन के नक्शे पर नहीं उभारा जा सका है। तमाम सरकारें आईं और गईं। बढ़-चढ़कर बातें भी की गईं, लेकिन मझुई व बिसुही नदी के संगम के किनारे स्थित इस धाम की उपेक्षा नहीं दूर हो सकी। प्रत्येक वर्ष पांच दिवसीय ऐतिहासिक मेला पवित्र श्रवण क्षेत्र धाम में लगता है, जिसमें बड़ी संख्या मेें श्रद्धालु भागीदारी करते हैं। इसके बाद भी मातृ-पितृ भक्ति के रूप में प्रसिद्ध श्रवण क्षेत्र धाम आज भी दिन बहुरनेे का इंतजार कर रहा है। विभिन्न जाति के मंदिर की श्रेणी यहां मौजूद है, जो चहुंओर अव्यवस्था से जूझ रहे हैं। यहीं से प्रत्येक वर्ष प्रबोधिनी एकादशी पर सप्तकोसी परिक्रमा भी होती है।
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विधानसभा चुनाव के मौके पर ऐेसे तमाम मुद्दे सामने आ रहे हैं, जो जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता में नहीं आ रहे हैं। इन्हीं में से एक मातृ-पितृ भक्ति के लिए प्रसिद्ध पवित्र श्रवण धाम लंबे समय से अपनी दुर्दशा व उपेक्षा पर आंसू बहा रहा है। लगभग तीन दशक पूर्व उस समय विकास की उम्मीद जगी थी, जब इसे पर्यटक स्थल घोषित किया गया था। तब से अब तक कई सरकारें आईं व गईं, लेकिन न जाने क्यों किसी भी सरकार की निगाहेें इस पवित्र धाम के उत्थान की तरफ नहीं गईं। पवित्र श्रवण क्षेत्र धाम की उपयोगिता को देखते हुए वर्ष 1991 मेें तत्कालीन भाजपा सरकार ने इसे पर्यटक स्थल घोषित किया था। घोषणा के अनुरूप अब तक इस तरफ कोई बड़ा कार्य नहीं कराया जा सका है। नतीजा यह है कि श्रद्धा से भरपूर होकर पूजन-अर्चन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
विभिन्न जातियों के 14 मंदिर स्थापित
चिउंटीपारा गांव स्थित पवित्र श्रवण क्षेत्र धाम में अलग-अलग जातियों के 14 मंदिरों की श्रेणी है। प्रत्येक जाति के लोग अपने मंदिर में पहुंचकर पूजन-अर्चन करते हैं। चिउंटीपारा के पूर्व प्रधान ओमप्रकाश गोस्वामी ने बताया कि 7 बीघा में फैले इस पवित्र धाम मेें यादव मंदिर, गुप्ता मंदिर, प्रजापति मंदिर, धोबी मंदिर, कुर्मी मंदिर, वनराजा मंदिर, पाल मंदिर, रविदास मंदिर, निषाद मंदिर, कहार मंदिर, नाऊ मंदिर, शंकर मंदिर व श्रवण क्षेत्र धाम कुटी स्थापित है। बताया कि प्रत्येक वर्ष अगहन पूर्णिमा को पांच दिवसीय मेले का आयोजन होता है। इसके अलावा प्रत्येक पूर्णमासी व अमावस्या को बड़ी संख्या मेें श्रद्धालु संगम में स्नान करने आते हैं। प्रबोधिनी एकादशी पर यहां से सप्तकोसी परिक्रमा की शुरुआत होती है।
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पर्यटन मंत्री से की थी मुलाकात
पूर्व प्रधान ओमप्रकाश गोस्वामी ने बताया कि ग्रामीणों के साथ प्रदेश के मौजूदा पर्यटन मंत्री मोती सिंह से मुलाकात की। उनसे पवित्र श्रवण क्षेत्र धाम के विकास व सौंदर्यीकरण की मांग की गई थी। इस मुलाकात के बाद शासन से 44 लाख रुपये की राशि धाम के विकास के लिए मंजूर की गई थी। इस राशि से घाट के बगल स्थित नया घाट, कपड़ा चेंजर, शौचालय, कुटी के अंदर मार्बल व मार्ग प्रकाश के लिए चार बड़ी लाइटें लगाने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है।
इन कार्यों की है जरूरत
गर्मी के मौसम में घाट के निकट पानी की कमी हो जाती है। इससे श्रद्धालु स्नान नहीं कर पाते हैं। इसके लिए डैम बनाए जाने की जरूरत है। इसके अलावा मुख्य मार्ग से धाम तक पहुंच मार्ग अत्यंत जर्जर हो चुका है। इससे मंदिर तक पहुंचने में श्रद्धालुओं को मुुश्किलों का सामना करना पड़ता है। मंडी समिति द्वारा मार्ग का निर्माण काफी पहले कराया गया था, लेकिन उपेक्षा के चलते मौजूदा समय में मार्ग जर्जर हो चुका है। सफाई का भी अभाव बना हुआ है। मार्ग प्रकाश के लिए अतिरिक्त हाईलोजन लैंप लगाने के साथ ही कम से कम दो दर्जन यात्री बेंचों की स्थापना कराने की जरूरत है। गर्मी के दिनों में शीतल पेयजल की उपलब्धता के लिए कम से कम दो वाटर कूलर यहां स्थापित किए जाने की जरूरत है। बच्चों के मनोरंजन के साधन स्थापित कराने के साथ ही ग्रामीणों ने पार्क विकसित किए जाने पर जोर दिया है।
जिम्मेदारों ने नहीं दिया ध्यान
मुख्य पुजारी राजपत्ती देवी उर्फ बच्चीदास ने कहा कि मातृ-पितृ भक्ति के रूप में प्रसिद्ध श्रवण क्षेत्र धाम की लंबे समय से उपेक्षा की जा रही है। सफाई, पेयजल, प्रकाश, आवागमन समेत अन्य विभिन्न प्रकार की अव्यवस्थाएं हैं। इनमें सुधार लाने के लिए कई बार जिम्मेदारों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक इसे लेकर कोई ठोस कदम जिम्मेदारों की ओर से नहीं उठाया जा सका है।
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