बताते चलें कि राज्य वित्त व 13वें वित्त के तहत वर्ष 2014-15 में ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए 34 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए थे। विकास कार्यों को लेकर शुरुआती दौर से ही मनमानी बरते जाने का मामला सामने आ रहा था। शिकायतें तो हुईं, लेकिन इसे कभी गंभीरता से नहीं लिया गया।
नतीजा यह रहा कि विकास कार्य को लेकर संबंधित ग्राम पंचायत के ग्राम विकास अधिकारी पूरी तरह लापरवाह बने रहे। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि टांडा विकास खण्ड के 12 से अधिक ग्राम पंचायतों में कराए गए विकास कार्यों की संबंधित ग्राम विकास अधिकारियों द्वारा न तो अब तक उपभोग प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया जा सका है और न ही विकास कार्यों की फीडिंग कराई जा सकी है।
बताया जाता है कि चालू वित्तीय वर्ष 2015-16 में योजना के तहत आई धनराशि संबंधित ग्राम पंचायतों में नहीं भेजी जा सकी है। इस बीच उपभोग प्रमाणपत्र न दिए जाने व कार्यों की फीडिंग कराए जाने में शिथिलता को गंभीरता से लेते हुए जिला पंचायतराज अधिकारी अनिल सिंह ने संबंधित विकास खण्ड के दो ग्राम विकास अधिकारी जसवंत कुमार व विनोद गुप्ता को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
कहा गया कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं रहा और शीघ्र ही उपभोग प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने के साथ साथ फीडिंग का कार्य पूर्ण नहीं किया गया, तो उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।