कैश की किल्लत से जूझ रहे ग्रामीण बैंकों में गुरुवार को भी कैश की कमी बनी रही। इससे लोगों को पर्याप्त रकम नहीं मिल सकी। कहीं पांच तो कहीं 10 हजार रुपये तक की ही मिल सके। जिला मुख्यालय पर एचडीएफसी, एक्सिस, बैंक ऑफ बड़ौदा व एसबीआई बैंक से ही पर्याप्त रकम मिल सकी। अन्य बैंकों में लोगों को ज्यादातर निराशा ही हाथ लगी। उधर, एटीएम सेवा की स्थित जस की तस ही बनी हुई है।
नोटबंदी के 50 दिन पूरे होने के बाद बैंकों में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद लगाए बैठे उपभोक्ताओं को ज्यादातर निराशा ही हाथ लगी है। जिला मुख्यालय पर तो फिर भी उपभोक्ताओं को कुछ राहत है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के बैंकों की स्थिति में विशेष सुधार नहीं हो रहा है। प्रतिदिन की तरह ही गुरुवार को भी ग्रामीण क्षेत्रों के बैंक कैश किल्लत से जूझते रहे।
भीटी प्रतिनिधि के अनुसार बैंक ऑफ बड़ौदा भीटी व सया शाखा में पांच से 10 हजार रुपये की ही निकासी हो सकी। महरुआ प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक महरुआ, नसीरपुर, रामबाबा व मंशापुर शाखा में गुरुवार को मात्र पांच-पांच सौ रुपये ही उपभोक्ताओं को मिल सके।
इसी प्रकार जलालपुर, राजेसुल्तानपुर, जहांगीरगंज, कटेहरी, अन्नावां, केदारनगर व ऐनवां आदि ग्रामीण क्षेत्रों के ग्रामीण बैंक की शाखाओं में उपभोक्ताओं को पर्याप्त धनराशि नहीं मिल सकी। इस बीच नोटबंदी के बाद से ही बेपटरी चल रही एटीएम सेवा की स्थिति गुरुवार को भी जस की तस ही रही।
जिला मुख्यालय पर एचडीएफसी, एक्सिस व एसबीआई के चार एटीएम, जलालपुर में बैंक ऑफ बड़ौदा, एचडीएफसी व एसबीआई तो टांडा में एचडीएफसी व एसबीआई के तीन एटीएम का ही संचालन हो सका। इन एटीएम के सापेक्ष ज्यादातर एटीएम से दो हजार के नोट निकलने से उन उपभोक्ताओं को दिक्कत हुई जिन्हें एक या डेढ़ हजार रुपये की आवश्यकता था।
जिला मुख्यालय पर स्थित एचडीएफसी व एसबीआई की मुख्य शाखा के एटीएम से दो हजार रुपये निकलने के चलते लाइन में लगे 50 से अधिक ऐसे उपभोक्ताओं को निराश होकर लौटना पड़ा, जिन्हें एक हजार रुपये की आवश्यकता थी। उधर एलडीएम अरुण कुमार सिंह ने बताया कि स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है। अगले कुछ दिनों में और ज्यादा सामान्य हो जाएगी।