न्यायालय का फैसला आने के बाद निराश हुए शिक्षामित्रों ने अब फिर से आंदोलन की राह पकड़ ली है। गुरुवार को जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। कहा कि यदि सरकार उनके मामले में अविलंब निर्णय नहीं लेगी तो उनका भविष्य चौपट हो जाएगा। बाद में प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम सदर को सौंपा गया।
उधर शिक्षामित्रों के इस आंदोलन को जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने भी समर्थन दिया है। शिक्षामित्रों का कहना है कि बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए वे 17 वर्षों से सेवारत हैं। जिला मुख्यालय पर इस बीच गुरुवार को आदर्श समायोजित शिक्षक वेलफेयर एसोसियेशन, प्राथमिक शिक्षामित्र संघ व शिक्षामित्र शिक्षक कल्याण समिति ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया।
तीनों संगठनों के आह्वान पर शिक्षामित्रों ने जिला मुख्यालय पहुंचकर आवाज बुलंद की। शिक्षामित्र संघ जिलाध्यक्ष केके दुबे ने शिक्षामित्रों से कहा कि उन्हें मौजूदा परिस्थितियों से जूझना होगा। वेलफेयर एसोसियेशन जिलाध्यक्ष अनिल विश्वकर्मा व कल्याण समिति जिलाध्यक्ष रामचंदर मौर्य ने कहा कि जब तक सरकार उनके पक्ष में कोई निर्णय नहीं लेगी, आंदोलन जारी रहेगा।
वक्ताओं ने कहा कि सरकार पर एक लाख 72 हजार शिक्षामित्रों के परिवारीजन को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी आ गई है। ऐसे में सरकार को जल्द से जल्द शिक्षामित्रों के हित में फैसला लेना होगा। शिक्षामित्रों के इस आंदोलन को जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने भी समर्थन दिया है। जिलाध्यक्ष घनश्याम तिवारी ने कहा कि संगठन उनके साथ है।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ भीटी ब्लॉक इकाई ने भी समर्थन दिया है। ब्लॉक अध्यक्ष बृजेश मिश्र ने कहा कि शिक्षामित्रों के आंदोलन में उनका पूरा सहयोग है। इस मौके पर ज्ञानेंद्र मणि मिश्र, दीपिका त्रिपाठी, नीलम त्रिपाठी, अंजू यादव, प्रियंका, रागिनी, अनामिका पांडेय, प्रमिला वर्मा, मनीषा व महेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।