अंबेडकरनगर। धान बिक्री के लिए तहसील से खतौनी सत्यापित कराना किसानों के लिए टेढ़ी खीर बन गया है। सरकार एक तरफ सभी किसानों के धान की खरीद का दावा करती है तो दूसरी तरफ पिछले एक सप्ताह से तहसीलों में वेब पोर्टल का सर्वर डाउन होने के चलते किसानों की खतौनी का सत्यापन नहीं हो पा रहा है। ऐसे में प्रतिदिन जिले के सभी पांचों तहसीलों में किसान चक्कर काटने को मजबूर हैं। सर्वर की गड़बड़ी के चलते तहसील के कर्मचारी भी बेबस नजर आ रहे हैं। काम न होने से कर्मचारियों और किसानों में तकरार आम बात हो गई है। इसके बावजूद किसानों की इस समस्या को दूर कराने की तरफ गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में धान बिक्री की उम्मीद लिए किसान भटकने को मजबूर हैं।
गौरतलब है कि शासन द्वारा धान खरीद में धांधली रोकने के लिए कई कायदे कानून बना दिए गए हैं। शासन का निर्देश है कि यदि कोई किसान 100 कुंतल से अधिक की धान बिक्री करता है तो उसे पहले लेखपाल से अपनी खतौनी को सत्यापित कराना होगा। इसके बाद आवेदन को तहसील में जमा करना होगा। तहसील के कर्मचारी संबंधित पोर्टल पर इसकी रिपोर्ट लगाएंगे। इसके बाद किसान क्रय केंद्रों पर अपने धान की बिक्री कर सकेगा। यही प्रक्रिया हजारों किसानों के लिए धान बिक्री में रोड़ा बन गया है। यह समस्या न सिर्फ अकबरपुर तहसील में है, बल्कि भीटी, जलालपुर, आलापुर व टांडा तहसील में भी यही हाल है।
करीब एक सप्ताह से जिस पोर्टल पर सत्यापित रिपोर्ट ऑनलाइन दर्ज करनी है, उस पोर्टल का सर्वर डाउन चल रहा है। ऐसे में तहसीलों में हर रोज किसान खतौनी सत्यापित कराकर रिपोर्ट फीडिंग कराने के लिए पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें मायूस होकर वापस लौटना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि एक तरफ सरकार किसानों के समुचित धान खरीद का दावा करती है, तो दूसरी तरफ खतौनी सत्यापन में आ रही मुश्किल को दूर कराने की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
गुरुवार को अकबरपुर तहसील पहुंचे बेवाना के रामबहादुर सिंह, अकबरपुर के जगत नारायण का कहना था कि वे लगातार तीसरे दिन अकबरपुर तहसील पहुंचे हैं। खतौनी सत्यापन कराना है, लेकिन जब वह यहां पहुंचते हैं तो कर्मचारी द्वारा बताया जाता है कि सर्वर डाउन होने के चलते यह कार्य नहीं हो पा रहा है। जलालपुर में मिले मालीपुर के शिवनाथ यादव, नगपुर के श्याम सुंदर व रामबिलास समेत अन्य लोगों का भी यही कहना है कि वह भी पिछले एक सप्ताह से खतौनी सत्यापन के लिए भटक रहे हैं।
ऐसा ही हाल टांडा, आलापुर व भीटी तहसील का भी है। किसान सरकारी क्रय केन्द्रों पर धान बिक्री के लिए भटक रहे हैं। एक तरफ किसानों को खतौनी सत्यापन कराना मुश्किल हो गया है तो दूसरी तरफ क्रय केंद्रों पर केंद्र प्रभारियों की मनमानी का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। किसानों ने जिला प्रशासन से जल्द से जल्द इस समस्या को हल करने की मांग ही है। कहा कि अविलंब इस व्यवस्था को सुचारु किया जाए अन्यथा किसानों को आंदोलन के लिए विवश होना पड़ेगा।
सर्वर डाउन होने की समस्या पिछले कुछ दिनों से सामने आ रही है। इस बाबत रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को प्रेषित की गई है। एक दो दिन में व्यवस्था सामान्य होने की उम्मीद है। गड़बड़ी दूर होते ही किसानों के खतौनी सत्यापन का कार्य प्राथमिकता पर कराया जाएगा। - अभिषेक पाठक, सदर एसडीएम