जिला अस्पताल में चिकित्सक को दिखाने का इंतजार करते मरीज।
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अंबेडकरनगर। बधिरों की जांच के लिए जिला अस्पताल में साढ़े चार लाख रुपये की लागत से साउंड प्रूफ कक्ष का निर्माण तो हो गया लेकिन न तो ऑडियो मीटर मशीन लग सकी और न ही स्टाफ की तैनाती हुई। नतीजा यह है कि कान की क्षमता जांच के लिए मरीजों को लखनऊ तक की दौड़ लगानी पड़ रही है।
बधिरों के सुनने की क्षमता की जांच के लिए स्वास्थ्य निदेशालय ने फरवरी 2023 में जिला अस्पताल में राष्ट्रीय बधिरता बचाव एवं रोकथाम कार्यक्रम के तहत साउंड प्रूफ कक्ष के निर्माण का निर्देश दिया था। साढ़े चार लाख रुपये की लागत से जिला अस्पताल में कक्ष संख्या 12 को लगभग एक माह पूर्व तैयार भी कर लिया गया।
संभावना थी कि शीघ्र ही इसका संचालन भी शुरू दिया जाएगा, लेकिन ऑडियो मीटर मशीन के न आने व स्टाफ की तैनाती न होने से संबंधित कक्ष का संचालन अधर में लटक गया है। नतीजा यह है कि बधिरता की जांच के लिए संबंधित को लखनऊ स्थित समेकित क्षेत्रीय केंद्र तक की दौड़ लगानी पड़ रही है। सबसे अधिक समस्या दिव्यांग प्रमाणपत्र हासिल करने को लेकर हो रही है। बधिरों को प्रमाणपत्र तभी हासिल होता है जब वे लखनऊ स्थित संबंधित केंद्र से जांच कराकर रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं। इसमें एक तरफ जहां संबंधित को आर्थिक चपत लगानी पड़ती है तो वहीं लखनऊ तक की दौड़ लगानी पड़ती है।
उधर सीएमओ डॉ. राजकुमार ने बताया कि साउंडप्रूफ कक्ष बनकर तैयार है। इस संबंध में स्वास्थ्य निदेशालय को जानकारी भी दे दी गई है। जून के अंतिम सप्ताह तक मशीन आने व स्टाफ की तैनाती की संभावना है।