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वार्डो में कबाड, मरीज गलियारे में

Sun, 20 Sep 2015 10:41 PM IST
अबेडकरनगर/अमर उजाला ब्यूरो
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इससे चिकित्सालय प्रशासन की मनमानी तथा मरीजों के हितों को लेकर बेफिक्री का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। मरीजों व तीमारदारों का कहना है कि यदि इन बड़े बड़े हाल में बेड की व्यवस्था कर दी जाए, तो गलियारे में बेड लगाने का जरूरत ही नही पड़ेगी।
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स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन व स्वास्थ्य राज्यमंत्री शंखलाल मांझी के गृहजनपद स्थित जिला अस्पताल का ही हाल बेहाल है। यहां न तो मरीजों को समुचित इलाज की सुविधा मिल पा रही है और न ही अन्य व्यवस्था। जनप्रतिनिधियों व अस्पताल प्रशासन को वार्डों में मरीजों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर बेड बढ़ाने की सुध नहीं है। मरीजों का इलाज गलियारे में किया जा रहा है। 

अस्पताल भवन में तीन बड़े बड़े ऐसे कक्ष नजर आए, जहां समूचे अस्पताल का कबाड़ भरा हुआ था। इन कक्षों का प्रयोग पूर्व में रसोईघर व वाशरूम के रूप में किया जाता था। विस्तारीकरण के बाद बने नए भवन में रसोईघर व वाशरूम स्थानांतरित हो जाने के चलते इस प्रकार के तीन कक्ष खाली हो गए।
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यदि अस्पताल प्रशासन चाहता, तो इन तीनों कमरों में बेड लगाकर अस्थाई वार्ड का रूप दिया जा सकता है। लोगों का कहना है कि यदि ऐसा किया जाए, तो उन मरीजों व उनके तीमारदारों को राहत मिल सकती है, जिनके बेड गलियारे में लगाए गए हैं।

तीमारदार मनोज व संतराम ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि अस्पताल प्रशासन को तो जैसे मरीजों व उनके तीमारदारों की कोई सुध ही नहीं है। कहा कि वार्ड में बेड की व्यवस्था किए जाने के लिए कई बार संबंधित अधिकारियों से कहा गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

प्रभारी सीएमएस डा. केएस पाण्डेय ने बताया कि पुराने भवन के वार्ड नंबर एक व दो को जब बंद किया गया, तो उसका समूचा सामान इन तीनों कक्षों में रखवा दिया गया। मरीजों का समुचित इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्हें कोई कठिनाई नहीं हो रही है।
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