अंबेडकरनगर। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में 1873 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इसमें से 750 में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा भगवान भरोसे है। इन विद्यालयों में चहारदीवारी का निर्माण नहीं हो सका है। इनमें कुछ तो ऐसे हैं जो 45 वर्ष से अधिक समय से संचालित हैं। इन विद्यालयों के भवन भी जर्जर हो चुके हैं। ऐसे में संबंधित विद्यालयों में छात्र-छात्राएं खतरों के बीच पढ़ने को मजबूर हैं। चहारदीवारी न होने से विद्यार्थियों, शिक्षकों को तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। साथ ही सुरक्षा के लिहाज से भी यह काफी महत्वपूर्ण मुद्दा है।
शिक्षण कार्य के दौरान मवेशियों के आ जाने से शिक्षण कार्य जहां प्रभावित होता है, वहीं छात्र-छात्राओं को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। आए दिन असामाजिक तत्व विद्यालय परिसर में घुस आते हैं। छुट्टी के बार जुआरियों का डेरा भी हो जाता है। कई बार तो कुछ शरारती तत्व पढ़ाई के दौरान भी परेशान करते हैं। इसके अलावा जानवरोें का घुसना तो आम बात है।
बाउंड्रीवाल न होने से गंदगी भी हो जाती है। सबसे ज्यादाअसहज स्थिति एमडीएम योजना के तहत दोपहर का भोजन तैयार करते और विद्यार्थियों के खाना खाते समय आती है। दरअसल, इस दौरान मवेशी घुस आते हैं। इससे कई बार छात्र-छात्राओं को भोजन छोड़कर भागना पड़ता है। अमर उजाला टीम ने कुछ ऐसे विद्यालयों का जायजा लिया, जहां बाउंड्रीवाल नहीं है।
जिला मुख्यालय से चंद कदम की दूरी पर स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में चहारदीवारी नहीं है। विद्यालय भवन बुरी तरह जर्जर हो चुका है। फर्श भी क्षतिग्रस्त है तो दरवाजे व खिड़कियां भी टूटे हुए हैं। जान जोखिम में डाल शिक्षाग्रहण कर रहे 34 छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को लेकर भी पूरी तरह लापरवाही का माहौल है। बाउंड्रीवाल का निर्माण अब तक नहीं कराया जा सका है। इससे अक्सर छात्र-छात्राओं के समक्ष विभिन्न प्रकार की मुश्किलें खड़ी होती हैं। प्रधानाध्यापिका हुसना ने बताया कि विद्यालय की स्थिति के बारे में बीते शिक्षा सत्र की समाप्ति पर बीएसए कार्यालय से मिले फार्म के माध्यम से जानकारी दी गई थी। बताया कि विद्यालय का रंगरोगन करा दिया गया है, लेकिन जर्जर भवन को दुरुस्त कराए जाने की अत्यंत आवश्यकता है।
जिला मुख्यालय से लगभग चार किमी दूर स्थित प्राथमिक विद्यालय कटरिया सम्मनपुर की स्थापना वर्ष 1974 में हुई थी। लगभग 45 वर्ष बीतने को हैं, लेकिन अब तक बाउंड्रीवाल तक का निर्माण नहीं हो सका है। शिक्षण कार्य या फिर एमडीएम योजना के तहत भोजन करने के दौरान विद्यालय परिसर में मवेशी आ जाते हैं। इससे छात्र-छात्राओं को अक्सर खाना छोड़कर भागना पड़ता है। प्रधानाध्यापक अनिल ने बताया कि बाउंड्रीवाल निर्माण के लिए 10 से अधिक बार जिम्मेदार अधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है। बताया कि विद्यालय में 25 छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। विद्यालय के बगल से ही गांव की तरफ जाने का रास्ता है। ऐसे में प्रत्येक समय वाहनों के आवागमन से छात्र-छात्राओं की सुरक्षा की चिंता बनी रहती है।
अकबरपुर विकास खण्ड के प्राथमिक विद्यालय भवन की स्थिति अत्यंत दयनीय है। भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। छत व दीवार के प्लास्टर उखड़ चुके हैं। कभी कभी पढ़ाई के दौरान प्लास्टर गिरने से छात्र-छात्राओं के बीच असहज स्थिति उत्पन्न हो जाती है। पेयजल समस्या भी लंबे समय से बनी हुई है। बाउंड्रीवाल तो है, लेकिन वह भी अत्यंत जर्जर हो चुकी है। प्रधानाध्यापक रिजवान अहमद ने बताया कि भवन की स्थिति के बारे में बीएसए कार्यालय को कई बार अवगत कराया गया। बताया कि 61 छात्र-छात्राएं विद्यालय में पंजीकृत हैं। भवन के जर्जर होने से इन छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है।
शासन को पत्र भेजा गया है। उम्मीद है कि शीघ्र ही शासन से राशि प्राप्त होगी। इसके बाद बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया जाएगा। जर्जर भवनों की मरम्मत भी कराई जाएगी।
- अतुल कुमार सिंह, बीएसए