राजेसुल्तानपुर (अंबेडकरनगर)। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश और बैराजों से छोड़े जा रहे पानी का असर अब सरयू नदी के किनारे बसे गांवों में साफ दिखाई देने लगा है। मंगलवार को नदी का जलस्तर छह सेंटीमीटर बढ़कर 84.54 मीटर पहुंच गया, जिससे मांझा क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ गई है। इटौरा ढोलीपुर के पूर्वी हिस्से में नदी का दबाव तेज होने से कटान बढ़ गया है और निचले खेतों में पानी घुसना शुरू हो गया है। खतरे के निशान से नदी अब सिर्फ 1.02 मीटर नीचे बह रही है।
सोमवार को जलस्तर 84.48 मीटर था, जो मंगलवार को बढ़कर 84.54 मीटर दर्ज किया गया। जलस्तर बढ़ने के साथ ही मांझा कम्हरिया और इटौरा ढोलीपुर के आसपास नदी का बहाव तेज हो गया है। खेतों में पानी पहुंचने से किसानों को फसलों और पशुओं के चारे की चिंता सताने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो खेती-किसानी पर सीधा असर पड़ेगा और नदी किनारे बसे लोगों की मुश्किलें भी बढ़ जाएंगी।
कटान से बचाव के लिए बाढ़ कार्य खंड अयोध्या की ओर से इटौरा ढोलीपुर के पास बंबू क्रेट लगाकर सुरक्षात्मक कार्य कराया जा रहा है। मांझा कम्हरिया निवासी रामचंद्र और सतिराम ने बताया कि पानी धीरे-धीरे खेतों में फैलने लगा है। यदि जलस्तर और बढ़ा तो हरे चारे के साथ खरीफ की फसलों को भी नुकसान हो सकता है।
हालांकि फिलहाल पानी आबादी से दूर है और बाढ़ जैसी स्थिति नहीं बनी है लेकिन नदी के तेवर बदलने से तटवर्ती गांवों के लोग सतर्क हो गए हैं। प्रशासन ने भी निगरानी बढ़ा दी है।
एसडीएम धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि सरयू नदी का जलस्तर बढ़ रहा है, लेकिन स्थिति नियंत्रण में है। किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए संबंधित विभागों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं।