माझा क्षेत्रों के खेतों में भरा सरयू का पानी।
राजेसुल्तानपुर(अंबेडकरनगर)। उफनाई सरयू नदी के जलस्तर में गिरावट आने लगी है। रविवार को नदी का पानी खतरे के निशान से 44 सेमी. नीचे पहुंचने से माझा क्षेत्र के हजारों लोगों ने राहत की सांस ली। इससे बाढ़ के पानी से घिरे गांवों के लोगों की मुश्किलें जल्द कम होने की उम्मीद है। दूसरी तरफ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जानवरों के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया है।
सरयू के उफनाने से आलापुर तहसील क्षेत्र के माझा इलाके के कल्लू का पूरा व निषाद बस्ती में तीन दिन पूर्व बाढ़ का पानी घुस गया था। दरवाजों तक पानी भरने से लोगों को आवागमन में काफी मुश्किल हो रही थी। इसके साथ करीब डेढ़ सौ बीघा खेत जलमग्न हो गए। उनमें लगी फसलों के खराब होने का संकट बना है। ग्रामीण अपने मवेशियों के चारे के लिए परेशान हैं।
इसके साथ ही बाढ़ के पानी से पटपरवा गांव का एक मार्ग भी कई दिन से डूब है। इस गांव के लोगों को भी आवागमन में मुश्किलें हो रही हैं। सरयू का जलस्तर शनिवार को स्थिर रहा लेकिन रविवार को उसमें गिरावट दर्ज की गई। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता संजीव सोनकर ने बताया कि रविवार सुबह जलस्तर खतरे के निशान 85.56 मीटर से 44 सेमी. नीचे पहुंच गया। जलस्तर में सोमवार तक और कमी आने की उम्मीद है।
नदी के जलस्तर में गिरावट से माझा इलाके के लोगों ने राहत महसूस की। हफ्ते भर से सरयू के जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए कल्लू का पूरा, निषाद बस्ती, पटपरवा के साथ एक दर्जन गांवों के लोग बाढ़ को लेकर घबराए थे।
जलस्तर पर रखी जा रही नगर
सरयू के जलस्तर में कमी होने लगी है। नदी के जलस्तर की निगरानी की जा रही है। बाढ़ प्रभावित गांवों में मवेशियों के लिए चारे की कमी नहीं होने दी जाएगी।
-डॉ. सदानंंद गुप्ता, एडीएम