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टांडा में लाल निशान से 37 सेंमी. ऊपर बह रही सरयू

Tue, 02 Aug 2016 12:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
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अंबेडकरनगर के राजेसुल्तानपुर मांझा क्षेत्रों में उफनाई सरयू नदी। - फोटो : अमर उजाला
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सरयू नदी के जलस्तर में वृद्धि का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। नदी का जलस्तर सोमवार शाम लाल निशान से 37 सेंमी. ऊपर पहुंच गया है। यह इस वर्ष का अब तक सर्वाधिक जलस्तर है। जलस्तर में निरंतर वृद्धि को देखते हुए तहसील क्षेत्र के लगभग एक दर्जन गांवों के लोगों में चिंता बढ़ रही है। उनका मानना है कि ऐसे माहौल में अगले कुछ दिनों में ही ज्यादा समस्या खड़ी होने वाली है।
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नदी के जलस्तर में चार-पांच दिनों से लगातार हो रही बढ़ोतरी के चलते बाढ़ प्रभावित मांझा उल्टहवा के सभी पुरवे पानी से घिर गए हैं। हालांकि अभी तक नदी का पानी घरों तक नहीं पहुंचा है लेकिन यहां पर स्थित प्राइमरी स्कूल बंद चल रहा है। पानी कभी भी यहां आबादी क्षेत्र में प्रवेश कर सकता है। मांझा क्षेत्र के लोगों में पानी के तेज बहाव व उफान के चलते मुश्किलें बढ़ने लगी हैं।

नाव से आवागमन में भी ग्रामीणों को खासी मुश्किल हो रही है। बाबूराम का पूरा, दिलशेर का पूरा व जालिम का पूरा में बाढ़ का पानी घरों तक पहुंचने में बेताब है। हालत यह है कि मवेशियों के चारे में कठिनाई हो रही है तो वहीं पेयजल का भी संकट खड़ा हो गया है। तटीय क्षेत्र के गांवों में लगे हैंडपंपों से बालूयुक्त पानी आने लगा है।
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मांझा उल्टहवा के कुछ ग्रामीण तो नदी के दूसरे छोर पर स्थित ऊंचे बंधे की तरफ चले गए हैं। मांझा करमपुर, बरसवां, मांझा अवसानपुर, मांझा कला, मांझा चिंतौरा, मांझा छज्जापुर व मांझा केवटला जैसे गांव बाढ़ के पानी से घिरे हैं। निकटवर्ती कई अन्य गांवों की तरफ भी पानी तेजी से बढ़ रहा है। नदी का पानी सोमवार शाम 4 बजे खतरे के निशान 92.73 मीटर के सापेक्ष 93.10 मीटर पर बह रहा है।

ऐसे में खतरे के निशान से जलस्तर 37 सेंमी. ऊपर है। तहसीलदार राजेश सिंह ने बताया कि बाढ़ चौकियों व शरणालय पर लगे कर्मचारियों को अलर्ट कर दिया गया है। कोई भी जरूरत पड़ने पर तत्काल ग्रामीणों की मदद सुनिश्चित होगी। सरयू नदी में आयी बाढ़ के चलते क्षेत्र में लगभग 300 बीघा फसल जलमग्न हो गई है। आलापुर तहसील क्षेत्र के आधा दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में हैं।

नदी के जलस्तर में हो रही वृद्धि को देखते हुए सुरक्षित स्थानों पर जाने को लेकर ग्रामीणों में चिंता व्याप्त होने लगी है। उनका मानना है कि अगले एक-दो दिनों में नदी के पानी से और ज्यादा क्षेत्र प्रभावित हो जाएंगे। कई गांवों में आबादी के बीच भी पानी पहुंच जाने की आशंका जताई जा रही है। उधर, प्रशासन ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उनकी सभी मदद की जाएगी।

 सरयू नदी के जलस्तर में कुछ दिनों से हो रही बढ़ोतरी के चलते तहसील क्षेत्र में बाढ़ का प्रकोप बढ़ने लगा है। यूं तो लगभग एक पखवारे पहले भी नदी के पानी से लगभग 150 बीघा फसल जलमग्न हो गई थी। उसके बाद जलस्तर में आयी कमी से ग्रामीणों ने राहत की सांस महसूस की थी।

हालांकि कुछ दिनों से एक बार फिर जिस तरह से नदी के जलस्तर में वृद्धि हुई है, उसके चलते एक के बाद एक कई गांवों में स्थित लगभग 300 बीघा खेत बाढ़ की चपेट में आ गया है। इससे धान व मक्का जैसी फसल बर्बाद होने की तरफ हैं। किसानों का मानना है कि यदि यही दौर जारी रहा तो एक-दो दिनों में और ज्यादा क्षेत्रफल में पानी का दुष्प्रभाव सामने आ सकता है।

फसलों के अलावा सब्जियों की खेती भी बाढ़ के चलते प्रभावित हुई है। फिलहाल मांझा कम्हरिया, सत्यनरायण का पूरा, बद्री का पूरा, पटफोरवा, सिद्धनाथ, कल्लू का पूरा व अराजी देवारा आदि गांव बाढ़ की चपेट में हैं।

नदी का पानी अभी इन गांवों में तो नहीं पहुंचा है लेकिन आवागमन पर असर पड़ रहा है। ग्रामीणों को कई जगह घुटनों तक पानी से होकर गुजरने की मजबूरी बनी हुई है। कई छात्र-छात्राओं ने तो स्कूल ही जाना बंद कर दिया है, पशुओं के चारे के प्रबंध में भी कठिनाई हो रही है। ग्रामीण रुकुमकेश व सतीराम ने कहा कि नदी का पानी इस बार ज्यादा कहर मचाने को बेताब दिख रहा है।

पानी में जिस तरह से बढ़ोतरी हो रही है, उससे अगले दो-तीन दिन में ज्यादा नुकसान होने की आशंका है। ऐसे में कई गांवों के भीतर पानी पहुंच सकता है। क्षेत्र की देवमती व लीला ने कहा कि प्रशासन को मदद लेकर सामने आना चाहिए। 
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