मौजूदा समय में नदी का जलस्तर 92.180 मीटर है जो कि खतरे के निशान से मात्र .550 मीटर नीचे है। यदि इसी प्रकार से जलस्तर में वृद्धि होती रही, तो शीघ्र ही जलस्तर खतरे का लाल निशान पार कर सकता है। लगातार बढ़ते जलस्तर के बावजूद संबंधित विभाग ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
बीते कुछ दिनों से पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही मूसलाधार बारिश से सरयू नदी के पानी में उफान आने लगा है। इसका सीधा प्रभाव टांडा व आलापुर तहसील के माझा क्षेत्र में रहनेन वाले लोगों पर पड़ना तय माना जा रहा है। वैसे तो बीते दिनों भी जलस्तर में वृद्धि हुई थी, लेकिन कुछ दिन बाद जलस्तर का बढ़ना रुक गया था। इस बीच रविवार अपराह्न से एक बार फिर से जलस्तर में वृद्धि होने लगी।
बाढ़ प्रखंड के अनुसार प्रति घंटा एक सेमी जलस्तर में वृद्धि हो रही है। सोमवार को दोपहर दो बजे तक नदी का जलस्तर 92.180 मीटर नापा गया, जो कि खतरे के लाल निशान 92.730 मीटर से .550 मीटर नीचे है। ऐसा माना जा रहा है कि यदि इसी प्रकार से जलस्तर में वृद्धि होती रही, तो शीघ्र ही जलस्तर खतरे का लाल निशान पार कर जाएगा।
उधर लगातार बढ़ रहे जलस्तर से निकटवर्ती माझा क्षेत्र के लोगों की चिंता बढ़ गई है। सबसे अधिक दहशत नदी से तीन तरफ से घिरे माझा उलटहवा के लोगों में है। दरअसल नदी का जलस्तर बढने से माझा उलटहवा के ग्रामीणों पर सीधा प्रभाव पड़ता है। उनका टांडा नगर से संपर्क समाप्त हो जाता है। इससे उनके समक्ष विभिन्न प्रकार की समस्याएं खड़ी हो जाती हैं।
इसके अलावा माझा चिंतौरा, माझा कला, माझा डुहिया, माझा नैपुरा, मुकाम दरगाह, माझा सहजौरा, माझा ढेलमऊ के अलावा नगर के नेहरूनगर, छज्जापुर, मेहनिया, राजघाट, मुबारकपुर आदि मोहल्ले बाढ़ से प्रभावित होते हैं। उधर लगातार बढ़ रहे जलस्तर के बावजूद संबंधित विभाग ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं।
लंबे समय से खराब पड़ी मोटर बोट को ठीक कराने की सुध अब तक नहीं ली जा सकी है। ऐसे में बाढ़ प्रभावित लोगों को बाहर निकालने के लिए किराए की नाव का सहारा लेना पड़ता है। इसके अलावा प्रमुख घाटों पर कटान रोकने के लिए भी अब तक कोई विशेष कदम नहीं उठाए जा सके हैं।
इतना ही नहीं, जलस्तर को प्रतिदिन नापने की भी व्यवस्था अब तक नहीं की जा सकी है। तैयारी के नाम पर मात्र नौ बाढ़ चौकियों का ही चयन किया जा सका है। ऐसे में यदि तेजी से जलस्तर में वृद्धि होती है, तो इसका खामियाजा माझा क्षेत्र के ग्रामीणों को भुगतना पड़ सकता है।