अंबेडकरनगर। बसखारी ब्लॉक के बलुआ गांव की सरोजा ने साबित कर दिया कि अगर मन में इच्छा हो तो बिना पंखों के भी उड़ान भरी जा सकती है। 2022 में ज्योति आजीविका मिशन से जुड़कर सेनेटरी पैड बनाने का प्रशिक्षण लेने वाली सरोजा ने न सिर्फ अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि अब गांव की 10 से 15 महिलाओं को जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बना रही हैं।
हाईस्कूल तक शिक्षित सरोजा ने अपने इस सफर की शुरुआत तीन साल पहले ज्योति आजीविका मिशन से जुड़कर की थी। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने अपना काम शुरू किया। इसके लिए उनका संपर्क लखनऊ की कुछ कंपनियों से हुआ जो सेनेटरी पैड तैया करती हैं। इनसे इन्होंने तैयार पैड खरीदने शुरू किए और घर पर लाकर पैकिंग की। इसके बाद इनकी आपूर्ति गांवों और कस्बों में शुरू की। अथक प्रयास से इनका काम आगे बढ़ रहा है। इस काम में अब वह गांव की 10 से 15 महिलाओं को भी जोड़ कर उन्हें आत्मनिर्भर बना रही हैं। कड़ी मेहनत की बदौलत हर माह 10 से 15 हजार रुपये कमा लेती हैं।