राजेसुल्तानपुर (अंबेडकरनगर)। सरयू नदी के जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी से तटवर्ती गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। सोमवार को नदी का जलस्तर तीन सेंटीमीटर बढ़कर 84.91 मीटर पहुंच गया। नदी अब खतरे के निशान से महज 65 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में पानी फैलने लगा है। आराजी देवारा और मांझा कम्हरिया के ग्रामीणों को एक बार फिर बाढ़ की आशंका सताने लगी है।
पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश और बैराजों से पानी छोड़े जाने के बीच सरयू का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। सोमवार को जलस्तर 84.88 मीटर से बढ़कर 84.91 मीटर दर्ज किया गया। पानी बढ़ने से आराजी देवारा बंधे के आसपास और करिया लोनिया का पूरा गांव तक पानी पहुंचने की आशंका बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी इसी गति से बढ़ती रही तो आने वाले दिनों में स्थिति मुश्किल हो सकती है।
ग्रामीण रामआसरे, धर्मेंद्र और सतिराम ने बताया कि बाढ़ आने पर सबसे पहले संपर्क मार्ग प्रभावित होते हैं। मांझा कम्हरिया के करीब एक दर्जन मजरे पानी से घिर सकते हैं। इससे बाजार, अस्पताल और अन्य जरूरी कामों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा के काम भी प्रभावित होते हैं।
तहसीलदार पद्मेश श्रीवास्तव ने बताया कि नदी का जलस्तर बढ़ा है, लेकिन फिलहाल यह खतरे के निशान से नीचे है। मांझा क्षेत्र में नाविकों को सतर्क कर दिया गया है। मांझा कम्हरिया और आराजी देवारा में संभावित बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन तैयार है।
टांडा के 12 से अधिक गांवों में सतर्कता
विद्युतनगर। सरयू किनारे बसे टांडा तहसील के उल्टहवा माझा, अवसानपुर, केवटला, डुहियां, महरीपुर माझा कला, माझा चिंतौरा, नैपुरा, सलोनाघाट और ढेलमऊ समेत एक दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं है। जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बीच ग्रामीण नदी और आसपास के हालात पर नजर रखे हुए हैं। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में होने से ग्रामीणों को राहत है, लेकिन तटवर्ती इलाकों में चिंता बरकरार है। बाढ़ खंड के जेई रमा ने बताया कि संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी की जा रही है। विभागीय टीम स्थिति पर नजर रखे हुए है। जरूरत पड़ने पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। (संवाद)
पशुओं के चारे का संकट
मांझा कम्हरिया के कल्लू का पूरा निवासी राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि बाढ़ के दौरान आवागमन की समस्या बढ़ जाती है। नदी का जलस्तर दोबारा बढ़ने से पशुओं के लिए हरे चारे का संकट भी खड़ा हो सकता है। पानी खेतों और निचले हिस्सों में फैलने से चारा उपलब्ध कराना मुश्किल हो जाएगा। सामाजिक कार्यकर्ता मित्रसेन ने बताया कि पानी उतरने के बाद जगह-जगह गंदा पानी, कीचड़, सड़े-गले खर-पतवार और गंदगी जमा हो जाती है। इससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने प्रशासन से पर्याप्त साफ-सफाई और जरूरी इंतजाम कराने की मांग की।
150 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण
राजेसुल्तानपुर। बाढ़ प्रभावित इलाकों में संक्रामक बीमारियों के खतरे को देखते हुए नौजवान भारत सभा-अंबेडकरनगर की ओर से आराजी देवारा के दर्शन नगर बंधे पर निशुल्क मेडिकल कैंप लगाया गया। शिविर में करीब 150 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर जरूरत के अनुसार निशुल्क दवाएं वितरित की गईं। चिकित्सक डॉ. आरके यादव ने बताया कि दूषित पानी के सेवन से डायरिया, हैजा, टाइफाइड और हेपेटाइटिस-ए जैसी बीमारियां हो सकती हैं। सभा ने प्रशासन से बाढ़ प्रभावित गांवों में नियमित स्वास्थ्य शिविर लगाने, साफ-सफाई कराने, कीटनाशक व ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करने और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की। कैंप में सुरेश, रामधनी, रिंकू विश्वकर्मा समेत अन्य लोग मौजूद रहे। (संवाद)
तमसा का जलस्तर बढ़ा, संगम घाट की गंदगी बहने लगी
श्रवणक्षेत्र। जिले में लगातार हो रही बारिश का असर नदियों के जलस्तर पर भी दिखाई देने लगा है। श्रवणक्षेत्र स्थित तमसा नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से बहाव तेज हो गया है। पिछले दिनों जलस्तर कम होने के कारण संगम घाट पर जगह-जगह गंदगी जमा हो गई थी। श्रद्धालुओं को हाथ-पैर धोने और नदी तक पहुंचने में परेशानी हो रही थी। बारिश के बाद जलस्तर बढ़ने और बहाव तेज होने से नदी की गंदगी बहकर आगे जाने लगी है। इससे घाट का स्वरूप भी धीरे-धीरे साफ होने लगा है। संगम घाट के पुजारी पंडित सुनील मिश्रा ने बताया कि नदी का जलस्तर बढ़ने से घाट पर जमा गंदगी काफी कम हुई है। मौसम सुहाना होने के कारण श्रवणधाम में श्रद्धालुओं की संख्या भी धीरे-धीरे बढ़ रही है। बारिश जारी रही तो नदी का पानी जल्द ही घाट की सीढ़ियों तक पहुंच सकता है। (संवाद)
राजेसुल्तानपुर के माझा कम्हरिया में सरयू नदी में डूबे परक्यूपाइन। संवाद
राजेसुल्तानपुर के माझा कम्हरिया में सरयू नदी में डूबे परक्यूपाइन। संवाद