अंबेडकरनगर के टांडा में खतरे का लाल निशान छूने को बेताब सरयू नदी का पानी।
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कई दिनों के उतार-चढ़ाव के बीच सरयू नदी का जलस्तर एक बार फिर उफान पर है। नदी का पानी पिछले पांच दिनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। खतरे के लाल निशान 92.73 मीटर से मात्र 71 सेमी नीचे है। इससे माझा क्षेत्र तथा निकटवर्ती गांवों में रहने वाले 10 हजार से अधिक ग्रामीणों में खौफ का माहौल है।
इस बीच प्रशासन ने तहसील स्तरीय सभी कर्मचारियों को सतर्क कर दिया है। सरयू नदी के जलस्तर में कई दिनों से उतार-चढ़ाव का दौर चला आ रहा था। नदी का पानी अभी खतरे के लाल निशान तक तो नहीं पहुंचा लेकिन उफान का दौर कई दिनों से बना हुआ है।
दो दिन से नदी के पानी में गिरावट व ठहराव का दौर दर्ज हो रहा था लेकिन इस बीच शनिवार रात से एक बार फिर नदी का पानी उफान की ओर है। नतीजतन सरयू का पानी खतरे के लाल निशान को पार करने कओ आतुर है। जलस्तर गुरुवार शाम चार बजे 92.01 मीटर पर था तो वहीं शुक्रवार सुबह 91.95 मीटर पर पहुंच गया।
शाम होते-होते पानी घटकर 91.55 मीटर तक आ गया। हालांकि इसके बाद एक बार फिर से नदी के जलस्तर में वृद्धि का दौर शुरू हुआ। शनिवार शाम को नदी का पानी 91.82 मीटर तक पहुंच गया था। रविवार की शाम चार बजे जलस्तर नापा गया तो वह बढ़कर 92.02 मीटर तक पहुंच गया था। गौरतलब है कि खतरे का निशान 92.73 मीटर पर है।
ऐसे में नदी का पानी खतरे के निशान से सिर्फ 71 सेमी नीचे है। इसे देखते हुए ही माझा क्षेत्र के ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। गांव के काफी नजदीक तक पानी पहुंच जाने से पशुओं के चारे आदि का संकट खड़ा होने लगा है। ग्रामीणों ने बताया कि सबसे ज्यादा मुश्किल पशुओं के लिए ही हो रही है।
उन्हें चारे की व्यवस्था के लिए भी नदी पार करना पड़ रहा है। यदि नदी का पानी 20-25 सेमी और ऊपर बढ़ गया तो किसी भी वक्त वह उनके घरों तक पहुंच सकता है। ऐसे में माझा क्षेत्र के लगभग दो हजार ग्रामीणों ने अपने-अपने सामान व संसाधनों की सुरक्षा के उपाय करना शुरू कर दिए हैं।