प्रबोधिनी एकादशी के मौके पर पवित्र धाम श्रवणक्षेत्र से सप्तकोसी परिक्रमा तमाम अव्यवस्थाओं के बीच शुरू हुई। नदी में स्नान के लिए साफ जल न होने की वजह से उन्हें ट्यूबवेल व हैंडपंपों पर स्नान करने या फिर घरों से स्नान कर परिक्रमा शुरू करने को विवश होना पड़ा।
रास्तों की बदहाली भी श्रद्घालुओं के लिए मुश्किल का सबब बनी। हालांकि इन सब के बावजूद श्रद्घालुओं की आस्था अव्यवस्थाओं पर भारी पड़ती। 10 हजार से अधिक युवाओं, महिलाओं व बुजुर्गों ने परिक्रमा में हिस्सा लिया। श्रद्घालुओं ने रास्ते में पड़ने वाले मंदिरों में भी जगह जगह माथा टेका। कई जगह श्रद्घालुओं के लिए कैंप भी लगाए गए थे।
बताते चलें कि दशकों पूर्व से मातृ-पितृ भक्त श्रवणकुमार की तपोस्थली तथा मड़हा, विसुही व तमसा नदियों के संगम तट पर सप्तकोसी परिक्रमा का आयोजन होता चला आ रहा है। प्रशासनिक उपेक्षा के चलते मौजूदा समय में श्रवणक्षेत्र की दशा काफी दयनीय हो चुकी है।
श्रद्घालुओं को संगम में डुबकी लगाने के लिए साफ जल ही नहीं बचा है। गुरुवार को श्रवणक्षेत्र पहुंचे श्रद्घालुओं के सामने ऐसे में डुबकी लगाने में दिक्कत खड़ी हुई। यही नहीं, यहां पर कई अन्य समस्याएं भी श्रद्घालुओं को गुरुवार को परिक्रमा शुरू करने के समय उठानी पड़ीं।
दूरदराज के क्षेत्रों के श्रद्घालु एक दिन पहले ही पहुंच चुके थे। प्रशासन द्वारा इनके रात्रि विश्राम से लेकर प्रकाश आदि की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। यहां तक कि सुरक्षा व्यवस्था भी भगवान भरोसे थी।
यदि किसी श्रद्घालु को कोई दिक्कत हो जाए तो प्रशासनिक व पुलिस प्रशासन का कोई जिम्मेदार व्यक्ति इस मौके पर मौजूद नहीं था। घाट पर प्रशासन द्वारा साफ सफाई व पानी की कोई व्यवस्था भी नहीं की गई थी। परिक्रमा मार्ग की बदहाली दूर कराने तक की जिम्मेदारी प्रशासन ने नहीं महसूस की।
अव्यवस्थाओं के बीच श्रद्घालुओं ने पूरी आस्था व भक्ति के साथ परिक्रमा शुरू किया। भोर से ही श्रद्घालु पवित्र धाम श्रवणक्षेत्र पहुंचे। कुछ श्रद्घालुओं ने परिसर में लगे ट्यूबवेल आदि पर स्नान किया तो कुछ ने हैंडपंपों पर।
कई श्रद्घालु जो घरों से स्नान कर पहुंचे थे, उन्होंने सिर्फ नदी का जल छिड़का। सभी श्रद्घालुओं ने श्रवण कुमार की समाधि स्थल पर बनी प्रतिमा के समक्ष माथा टेका। इसके बाद परिक्रमा के लिए निकल पड़े। श्रवणक्षेत्र से अन्नावां, शिवबाबा, अकबरपुर, शहजादपुर पूर्वी नाका से वापस परिक्रमार्थी पहितीपुर तिराहे तक गए।
यहां से पहितीपुर होते हुए श्रद्घालु फिर श्रवणक्षेत्र धाम पहुंचे। परिक्रमा कर रहे पवन कुमार, शिवपूजन, महेन्द्र कुमार आदि ने प्रशासन की उपेक्षा पर नाराजगी जतायी। कहा कि प्रशासन को कम से कम परिक्रमा मार्ग को ही बेहतर करा देना चाहिए था। इसके अलावा घाट पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करानी चाहिए थी।