अंबेडकरनगर। जाफरगंज रेलवे स्टेशन के लूप ट्रैक पर मिले अर्पित के शव के मामले की विवेचना सम्मनपुर थानाध्यक्ष को हस्तांतरित कर दी गई है। अब एसओ अर्पित की मौत की जांच करेंगे। तीन दिन बीत जाने के बाद पुलिस अभी तक नामजद आरोपियों को पकड़ने में नाकाम रही है।
अकबरपुर के करतोरा निवासी अर्पित (22) नौ अप्रैल को घर से निकले थे। 10 अप्रैल की सुबह युवक का शव घर से करीब दो किलोमीटर दूर जाफरगंज स्टेशन की लूप लाइन पर मिला था। अर्पित की जेब से मिले मोबाइल से उसकी शिनाख्त कर जीआरपी ने परिजनों को सूचना दी थी। मामले में शुरुआत से ही परिजन हत्या की बात कह रहे थे, लेकिन जीआरपी पुलिस पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद अग्रिम कार्रवाई करने की बात कह रही थी। मृतक के पिता रामउदित ने आरोप लगाया था कि उनके बेटे को घर से बुलाकर हत्या करने के बाद शव को रेलवे ट्रैक पर रखा गया है।
शुक्रवार को पोस्टमाॅर्टम रिपोर्ट आने के बाद परिजन जब तहरीर लेकर जीआरपी थाने पहुंचे तो उनको यह कहकर लौटा दिया था कि अर्पित की हत्या जीआरपी थाना क्षेत्र के बाहर हुई है। ऐसे में केस अकबरपुर कोतवाली में दर्ज होगा। इस मुद्दे को अमर उजाला ने गंभीरता से उठाया और एसपी जीआरपी लखनऊ से भी पूरे प्रकरण पर वार्ता की थी। इसके बाद जीआरपी ने देर रात केस तो दर्ज कर लिया, लेकिन यहां भी खेल कर दिया। हत्या के बजाय गैर इरादतन हत्या व सबूत छुपाने का केस यहिया कमालपुर के प्रमोद व गुलाब चंद्र के अलावा करतोरा गांव के अक्षय कुमार और गुलशन के खिलाफ दर्ज किया। शुरुआत से ही सवालों के घेरे में जीआरपी की कार्यशैली पर अब परिजन अपराधियों पर मुकदमा दर्ज करने लापरवाही बरतने का आरोप लगा रहे हैं। अब जीआरपी ने जांच सम्मनपुर पुलिस को सौंप दी है। थाना प्रभारी जय प्रकाश यादव ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है।