नोटबंदी के बाद से बाजारों में सन्नाटे का माहौल है लेकिन पेट्रोलपंपों पर बहार ही बहार है। न सिर्फ डीजल व पेट्रोल की खपत डेढ़ गुना तक बढ़ गई है बल्कि लंबे समय से चल रहे बकाए का भी भुगतान कर दिया गया। और तो और कुछ ने तो पुराने बड़े नोट खपाने के लिए एडवांस तक दे डाला। इससे पेट्रोलपंप मालिकों की इन दिनों बल्ले-बल्ले हो गई है।
गौरतलब है कि 8 नवंबर को बड़े नोटों पर बैन लगने के बाद से बाजारों में सन्नाटा पसरने लगा है। जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक के बाजारों की रौनक गायब हो गई। बाजारों में मंदी के इस दौर के बीच जिले के लगभग 75 पेट्रोलपंपों जिसमें इंडियन आयल के 35, भारत पेट्रोलियम के 18, हिंदुस्तान पेट्रोलियम के 20 व एसआर के दो पेट्रोलपंपों पर इन दिनों बहार आ गई है।
पुराने बड़े नोट को खपाने के लिए न सिर्फ प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग डीजल व पेट्रोल लेने के लिए पंपों पर पहुंच रहे हैं बल्कि आवश्यकता से अधिक की खरीदारी भी कर रहे हैं। इसके अलावा न सिर्फ लंबे समय से चल रहा बकाया भुगतान किया जा रहा है बल्कि एडवांस में भी धनराशि जमा की जा रही है।
जिला मुख्यालय के अकबरपुर-टांडा मार्ग पर स्थित इंडियन आयल के देवांश पेट्रोलपंप के मैनेजर सुरेंद्रनाथ पांडेय ने बताया कि नोटबंदी से पहले प्रतिदिन 12 हजार लीटर डीजल व चार हजार लीटर पेट्रोल की बिक्री होती थी लेकिन इसके बाद से 20 हजार लीटर डीजल व छह हजार लीटर पेट्रोल की खपत हो रही है।
बताया कि लगभग ढाई लाख रुपये का बकाया भुगतान भी मिल गया है जबकि कुछ लोगों ने एडवांस में धनराशि भी जमा की है। अकबरपुर-मालीपुर मार्ग पर स्थित भारत पेट्रोलियम के आनंद फीलिंग स्टेशन के मैनेजर त्रिभुवननाथ ने बताया कि 8 नवंबर से पहले दो हजार लीटर पेट्रोल व पांच हजार लीटर डीजल की बिक्री होती थी।
नोटबंदी के बाद से तीन हजार लीटर पेट्रोल व सात हजार लीटर डीजल की बिक्री हो रही है। कहा कि जो लोग 70 लीटर डीजल ले जाते थे, वे अब 100 से डेढ़ सौ लीटर डीजल ले जा रहे हैं और उसका नगद भुगतान भी कर रहे हैं। इसी मार्ग स्थित इंडियन आयल के हिंद फीलिंग स्टेशन के मैनेजर अब्बास रिजवी ने कहा कि नोटबंदी से पहले सात हजार लीटर डीजल व ढाई हजार लीटर पेट्रोल की बिक्री प्रतिदिन होती थी।
इसके बाद से अब प्रतिदिन आठ हजार लीटर डीजल व तीन हजार लीटर पेट्रोल की बिक्री हो रही है। कहा कि लगभग 100 ट्रक की उधारी थी जिसका अब तक भुगतान हो चुका है। कुछ ने तो एडवांस रुपये दे रखे हैं। कहा कि जो पहले 20 ड्रम डीजल ले जाया करते थे, वे अब नगद भुगतान कर 30 ड्रम डीजल ले जा रहे हैं। कुछ इसी प्रकार की स्थित जिले के अन्य क्षेत्रों में स्थापित विभिन्न एजेंसियों के पेट्रोलपंपों की भी है।