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यूपी में पेपर लीक से जुड़े हो सकते हैं सादिक के तार

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अंबेडकरनगर। उत्तराखंड से फरार घोषित अकबरपुर निवासी सादिक मूसा के तार यूपी की प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों के लीक होने से भी जुड़े हो सकते हैं। यूपी एसटीएफ ने भी इसकी जांच शुरू कर दी है। इस बीच सादिक के राजनीतिक कनेक्शन को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। चर्चा है कि उत्तराखंड में उसका बोलबाला तब हुआ जब अंबेडकरनगर के एक पूर्व मंत्री को वहां का प्रभारी बना दिया गया। इसी के बाद सादिक का आवागमन उत्तराखंड जल्दी-जल्दी होने लगा। जिसके बाद उसने पेपर लीक करने जैसे काले कारोबार में कदम आगे बढ़ाया।
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उत्तराखंड की प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक के मास्टर माइंड के तौर पर सामने आए शहजादपुर निवासी सादिक मूसा को लेकर अब कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब तक सामने आया है कि वह उत्तराखंड में पिछले करीब पांच साल से परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक करा रहा है। इसी आधार पर गैंगेस्टर लगाने के साथ ही उसे फरार घोषित कर दिया गया है। अब आम लोग आशंका जता रहे हैं कि सादिक यूपी की तमाम परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने में भी शामिल हो सकता है।
बीते दिनों यूपी में पेपर लीक होने के तार अंबेडकरनगर से भी जुड़े रहे हैं। हालांकि उसके आरोपियों से सादिक का कोई सीधा कनेक्शन अब तक सामने नहीं आया है। लेकिन इसकी जांच जरूर होगी। इस बीच सादिक के पेपर लीक कांड में शामिल होने का खुलासा होने के बाद जिला मुख्यालय पर उसे लेकर चर्चाओं का माहौल गर्म है।
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कहा जा रहा है कि जिले के एक पूर्व मंत्री को जब उत्तराखंड का बसपा प्रभारी बनाया गया था तो उसी समय उनके बेटे से करीबी के चलते सादिक मूसा की पहुंच वहां तक हो गई। इसके बाद ही उत्तराखंड के अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने वाले आरएमएस साल्यूशन के मालिकान से सादिक के संबंध हो गए। इसी के बाद सादिक ने इस काले खेल में हाथ अजमाना शुरू किया।
लोगों का कहना है कि सादिक से जुड़े अंबेडकरनगर के सहयोगियों की जांच की जाए तो कई और कारनामे उजागर हो सकते हैं। क्योंकि सादिक के साथ रहने वाले कई लोग भी अचानक मालामाल होते दिखे हैं। ऐसे में उन पर शिकंजा कसा जाए तो कई राज सामने आएंगे। इसी इनपुट के आधार पर एसटीएफ ने गोपनीय जांच शुरू कर दी है।
बाहर से साधारण, अंदर आलीशान घर
बिना किसी कारोबार, नौकरी या मजबूत पारिवारिक पृष्ठभूमि के सादिक मूसा का अकबरपुर नगर के शहजादपुर में आलीशान घर है। स्थानीय लोग बताते हैं कि रामजानकी मंदिर के पास एक गली में सादिक का घर बाहर से देखने पर तो साधारण सा है, लेकिन अंदर की डिजाइन व संसाधन अत्यंत उच्चकोटि के हैं। जगुआर व बीएमडब्लू जैसी महंगी कारों से चलने वाले सादिक के पास कई बेशकीमती कारें हैं। अकबरपुर परिवहन महकमे में उसके नाम कोई कार रजिस्टर्ड नहीं है, लेकिन आधा दर्जन से अधिक कारों को रखने के लिए सादिक ने एनएच 232 पर गौहन्ना चौराहे के पास एक गैरेज बनवा रखा है। किसी को कोई शक न हो यहां बड़े पैमाने पर दोना, पत्तल आदि रखा है। खबर यह भी है कि लखनऊ से लेकर बस्ती, अयोध्या, नोएडा व उत्तराखंड तक में उसके कई प्लॉट व फ्लैट हैं।
एक सीरीज के नंबरों का शौक
सादिक मूसा को अपने वाहनों में एक खास किस्म के नंबरों की सीरीज का शौक है। वह जिन चार पहिया व दो पहिया वाहनों से चलता रहा है, उसका नंबर प्राय: एक जैसे अंत में डबल जीरो होते थे। आगे के दोनों नंबर भी एक ही होते थे। बताया जाता है कि कई दलों के नेताओं एवं व्यापारियों को भी उसने इसी सीरीज की गाड़ी भेंट कर दी। अब वह भी जांच के घेरे में आएंगे। यह भी खबर है कि उसके पैसे से कई तरह के कारोबार व ठेके चल रहेे हैं।
जनेश्वर मिश्र पार्क के पास था अड्डा
लखनऊ के जनेश्वर मिश्र पार्क के पास एक अपार्टमेंट में फरार सादिक का अड्डा था। वहीं पर उससे मिलने के लिए उसके गुर्गे जाया करते थे। इसमें अंबेडकरनगर के व्यापारी व कई दलों के नेता एवं पदाधिकारी भी शामिल हैं। इन सभी के जुटने पर वहां एक बार हंगामा भी हुआ था। बताया जाता है कि पुलिस टीम भी पहुंची थी, लेकिन पहुंच के चलते मामला रफा-दफा हो गया।
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