अंबेडकरनगर। नए जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए साधू वर्मा की पंचायत राजनीति में तगड़ी पैठ रही है। वे चौथी बार बीते दिनों जिला पंचायत सदस्य चुने गए थे। भसड़ा गांव निवासी साधू के घर में बीते चुनाव से ग्राम प्रधान का पद भी चला आ रहा है। जाहिर तौर पर मतदाताओं के बीच यह मजबूत पकड़ उनके अपने कार्य व्यवहार और व्यक्तित्व का ही नतीजा है।
जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए साधू वर्मा का त्रिस्तरीय पंचायत से जुड़ी राजनीति में लगभग दो दशक से दबदबा चला आ रहा है। साफ सुथरी छवि और मिलनसार व्यक्तित्व वाले साधू वर्ष 2005 में पहली बार टांडा तहसील क्षेत्र से निर्दल जिला पंचायत सदस्य चुने गए। वर्ष 2010 में उन्हें बसपा ने टिकट दिया। वे जीतकर जिला पंचायत सदन में पहुंचे। 2015 में एक बार फिर उन्होंने बसपा के टिकट पर जीत हासिल कर ली। इस बार उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा। लगभग 10 हजार मतों के रिकॉर्ड अंतर से वे जिला पंचायत सदस्य चुने गए।
राजनीति में पूर्व मंत्री और बसपा विधानमंडल दल के नेता रहे लालजी वर्मा के अत्यंत करीबी साधू ने अपनी प्रारंभिक से लेकर इंटर तक की शिक्षा टांडा से हासिल की, जबकि स्नातक से लेकर परास्नातक तक की डिग्री इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मिली। पूर्व मंत्री के करीबी साधू ने पंचायत चुनाव की राजनीति को ही केंद्र बनाया।
नतीजा यह कि एक तरफ वे जिला पंचायत सदस्य चुने जाते रहे तो दूसरी तरफ उन्हें वर्ष 2010 में भसड़ा ग्राम पंचायत से अपनी मां को ग्राम प्रधान निर्वाचित कराने की सफलता मिली। 2015 तथा बीते दिनों हुए चुनाव में भी साधू के भाई ग्राम प्रधान चुने गए। इन सबको साधू के सरल व्यवहार और बेहतर व्यक्तित्व का परिणाम माना गया। वे कहते हैं कि मैं बस सबकी सेवा पर ध्यान देता हूं। कौन क्या है और कैसा है यह परवाह किए बगैर सबकी मदद करना मैं अपना धर्म समझता हूं। इसी वजह से आम लोग मुझे हाथों हाथ लिए रहते हैं। मतदाताओं के मुश्किल वक्त में उनके साथ हर तरह से खड़ा रह सकूं, यह मेरी हमेशा कोशिश होती है। यह सेवा लगातार बनी भी रहेगी।