अंबेडकरनगर। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अंतत: टांडा से निर्दलीय जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए साधू वर्मा को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है। वे बीते दिनों ही भाजपा में शामिल हुए थे। उन्हें भाजपा का प्रत्याशी घोषित किए जाने का तमाम पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया है। इस बीच साधू वर्मा को बीजेपी की ओर से प्रत्याशी घोषित किए जाते ही जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव की सरगर्मी और बढ़ गई है। समाजवादी पार्टी ने अजीत यादव को पहले ही प्रत्याशी घोषित कर रखा है, जबकि बसपा ने अभी तक अपना पत्ते नहीं खोले हैं।
जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव को लेकर मुकाबले में रोमांच बढ़ने लगा है। एक तरफ जहां 41 सदस्यीय जिला पंचायत में सर्वाधिक लगभग एक दर्जन सीट जीतने वाली सपा ने आलापुर के सपा नेता जिला पंचायत सदस्य अजीत यादव को कई दिन पहले ही प्रत्याशी घोषित कर दिया था, वहीं सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी में टिकट को लेकर उहापोह की स्थिति बनी हुई थी।
पूर्व ब्लॉक प्रमुख अजय सिपाही ने जिला पंचायत सदस्य अमरेंद्र पाल के लिए पूरी ताकत लगा रखी थी। तमाम पार्टी नेता और कार्यकर्ता भी अमरेंद्र के पक्ष में थे, जबकि कई बड़े नेता और कार्यकर्ता साधू वर्मा के साथ मजबूती से खड़े थे। इसी खींचतान के बीच बीते दिनों साधू वर्मा जब लखनऊ में क्षेत्रीय अध्यक्ष शेषनारायण मिश्र के समक्ष बीजेपी में शामिल हो गए, तब उन्हें टिकट मिलने की सुगबुगाहट तेज हो गई। इस बीच गुरुवार को पार्टी के प्रांतीय नेताओं ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए साधू वर्मा के नाम को हरी झंडी दे दी।
इसी क्रम में गुरुवार को दोपहर बाद जिलाध्यक्ष डॉ. मिथिलेश त्रिपाठी ने उन्हें भाजपा का प्रत्याशी घोषित होने का पत्र जारी कर दिया। इसके बाद जिला कार्यालय पर जिलाध्यक्ष मिथिलेश, पूर्व राष्ट्रीय परिषद सदस्य रमाशंकर सिंह, जिला उपाध्यक्ष विमलेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सुधीर सिंह तथा मीडिया प्रभारी बाल्मीकि उपाध्याय की मौजूदगी में साधू वर्मा का स्वागत करते हुए उन्हें प्रत्याशी घोषित करने का पत्र सौंपा गया।
इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि पार्टी जीत तय करने के लिए सभी सदस्यों के संपर्क में हैं। उधर, भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी घोषित करते ही जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव की सरगर्मी बढ़ गई है। समाजवादी पार्टी के खेमे में रणनीति को अमल में लाने की कवायद तेज होती दिखी, जबकि बसपा ने अभी तक अपने पत्ते ही नहीं खोले हैं।