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ग्रामीण बैंकों से मिली मामूली रकम, 6 हजार ग्राहक मायूस

Wed, 23 Nov 2016 11:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
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बैंक - फोटो : symbolic
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नोटबंदी के चलते बैंकों में बुधवार को भी धनाभाव रहा। बड़ौदा पूर्वी उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की सभी 48 शाखाएं कैश के संकट से जूझ रही हैं। ज्यादातर शाखाओं में दोपहर तक दो हजार रुपये का भुगतान किया गया जबकि दोपहर बाद एक हजार का ही भुगतान करने की मजबूरी आ गई। बुधवार को ग्रामीण बैंक तक पहुंचे लगभग छह हजार उपभोक्ताओं को मामूली रकम लेकर निराश हो लौटना पड़ा।
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इन सबके बीच अभी भी ज्यादातर एटीएम के न चल पाने से उपभोक्ताओं को भटकना पड़ रहा हैै। 14 दिन बीत जाने के बाद भी धनाभाव को लेकर अब उपभोक्ताओं में आक्रोश भी साफ दिखाई पडने लगा हैै। उपभोक्ताओं ने कहा कि जहाज से करेंसी पहुंचाने का जो दावा बड़े सेंटरों पर किया गया था, उसका पालन क्यों नहीं किया जा रहा हैै।

 नोटबंदी के बाद से अब बैंकों में पुराने बड़े नोट जमा करने वालों की लाइन दिन-प्रतिदिन तो कम हो रही है लेकिन धन-निकासी के लिए लाइन का दौर अभी थम नहीं सका है। धन-निकासी के लिए बैंक खुलने के समय से पहले ही उपभोक्ता लाइन में लग रहे हैं। बुधवार को भी यह समस्या बनी रही।
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जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित विभिन्न बैंकों की शाखाओं में सुबह से धन-निकासी के लिए उपभोक्ताओं की लंबी लाइन लग गई। सबसे ज्यादा समस्या बड़ौदा पूर्वी उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक से जुड़े उपभोक्ताओं को हो रही है।

प्रतिदिन इन बैंक की सभी 48 शाखाओं को औसतन पांच से छह लाख रुपये भुगतान की जरूरत होती है लेकिन इन दिनों डेढ़ से दो लाख रुपये ही सभी शाखाओं को मिल पा रहे हैं। नतीजतन ज्यादातर उपभोक्ताओं को एक से दो हजार रुपये तक का ही कैश घंटों इंतजार के बाद मिल पा रहा है। बुधवार को भी ग्रामीण बैंक की शाखाओं में पहुंचे उपभोक्ताओं को इन्हीं मुश्किलों से जूझना पड़ा।

 जलालपुर प्रतिनिधि के अनुसार कैश के संकट का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ग्रामीण बैंक की स्थानीय शाखा में दोपहर तक तो दो-दो हजार रुपये का भुगतान उपभोक्ताओं को किया गया जबकि दोपहर बाद एक हजार का ही भुगतान कर पाने की मजबूरी आ गई। तहसील क्षेत्र की कई शाखाओं में तो   बीच-बीच में भुगतान रोक देने की नौबत बनी रही।

 भीटी प्रतिनिधि ने बताया कि बड़ौदा ग्रामीण बैंक की रिउना शाखा में पहुंचे उपभोक्ताओं को बुधवार को भी एक से दो हजार रुपये तक ही थमाया गया। कई उपभोक्ताओं की इसे लेकर बैंक कर्मियों से झड़प भी हुई तो वहीं कुछ उपभोक्ता बैंककर्मियों की मजबूरी समझ चुपचाप धनराशि लेकर अपने घर चले गए। उधर उपभोक्ताओं की मुश्किलें सिर्फ ग्रामीण बैंक तक ही सीमित नहीं रहीं।

जिला मुख्यालय पर बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा में भी बुधवार को भारी धनाभाव रहा लेकिन कुछ देर में ही स्थिति नियंत्रण में कर ली गई। जिले की कई अन्य बैंक शाखाओं में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिली। इस बीच तमाम दावों के बाद भी बुधवार को ज्यादातर एटीएम से धन-निकासी नहीं हो सकी। इससे उपभोक्ताओं को लगातार एक से दूसरे एटीएम का चक्कर लगाने को विवश होना पड़ा।

इल्तिफातगंज प्रतिनिधि के अनुसार बाजार में एसबीआई व बीओबी के दो एटीएम बूथ लगे हैं। दोनों से ही बुधवार को धन-निकासी नहीं हो पाई। उपभोक्ता धीरेंद्र ने नाराजगी जताते हुए कहा कि केंद्र ने तो जहाजों से करेंसी पहुंचाए जाने का दावा बढ़-चढ़कर किया था लेकिन वह दावा हवा-हवाई ही साबित हुआ है।

सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। गृहणी दीपिका ने कहा कि जो एटीएम चल भी रहे हैं, वहां महिलाओं की अलग से लाइन नहीं लग रही। सरकार को इस तरफ भी ध्यान देने की जरूरत है। एलडीएम अरुण कुमार सिंह ने बताया कि बैंकों में करेंसी की उपलब्धता के लिए उच्च स्तर तक प्रयास चल रहे हैं। आने वाले दिनों में स्थिति तेजी से सुधरेगी। जो एटीएम नहीं चल रहे हैं, उन्हें भी आगे चलाने का प्रयास किया जा रहा है। 
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