जिले में मड़हा व विसुुही नदियों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है। वर्ष के तीन चौथाई से अधिक समय इन नदियों में पानी ही नहीं रहता। एक ओर तमसा नदी में पानी तो रहता है लेकिन उसका दायरा लगातार सिकुड़ता जा रहा है।
कई जगहों पर तमसा किसी छोटे नाले जैसी दिखाई पड़ने लगी है। इन तीनों प्रमुख नदियों से जिले के पांच में से तीन तहसील क्षेत्र जुड़े हुए हैं। इसके बाद भी शासन से लेकर प्रशासन तक कहीं भी इन नदियों को लेकर फिक्र नजर नहीं आती।
नदियों में पानी की उपलब्धता तय करने से लेकर उनकी साफ-सफाई कराने आदि का कोई अभियान लंबे समय से नहीं चल सका है। इक्का-दुक्का सामाजिक संगठनों ने कभी फर्जी अदायगी जरूर निभाई लेकिन उनकी तरफ से भी ऐसा कोई अभियान नहीं चला जिसका सार्थक परिणाम सामने आ सके।
गर्मी के बढ़ते प्रकोप के बीच ऐसी नदियां पशु-पक्षियों की प्यास बुझाने से लेकर खेतों की सिंचाई तक में प्रमुखता से योगदान देतीं थीं लेकिन अब तो इसकी उम्मीद तक करना बेमानी हो गया है।
नदियों के मामले में अंबेडकरनगर जिला समृद्ध माना जाता है। दो तहसील टांडा व आलापुर से होकर सरयू गुजरती है जबकि भीटी व अकबरपुर तहसील में मड़हा व विसुही नदी का प्रभाव रहा है। अकबरपुर से होकर तमसा नदी भी गुजरती है जो जलालपुर तहसील तक जाती है।
लगभग दो दशक पूर्व इन तीनों नदियों से लोगों को खासा फायदा पहुंचता था। कारण यह कि वर्ष भर इन नदियों में भरपूर पानी दिखाई पड़ता था। पर्यावरण के प्रति लोगों के जागरूक न रहने तथा नदियों पर बढ़ते अतिक्रमण व गंदगी आदि के चलते पानी का संकट धीरे-धीरे गहराने लगा।
प्रशासनिक मशीनरी से लेकर जनप्रतिनिधियों तक की उपेक्षा ने इस संकट को और ज्यादा व्यापक बना दिया है। फैजाबाद जिले से निकलकर भीटी तहसील में पहुंचने वाली विसुही नदी की दशा सबसे ज्यादा चिंताजनक है। इसमें अब बरसात के मौसम में ही लगभग चार माह पानी दिखाई पड़ता है।
बाकी के आठ माह नदी सूखी पड़ी रहती है। डेढ़ दशक पहले इस नदी की एक बार सफाई भी करवाई गई थी लेकिन उसके बाद से कोई ध्यान नहीं दिया गया। फैजाबाद से ही निकलकर भीटी होते हुए श्रवणक्षेत्र तक पहुंचने वाली मड़हा नदी की दशा विसुही से थोड़ा ठीक है।