राजेसुलतानपुर। आलापुर तहसील क्षेत्र में नदी के किनारे बसे गांवों के ग्रामीणों को नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही चिंता सताने लगी है। प्रसाद कुर्मी का पूरा व हंसू का पूरा के दो मजरों के रास्ते पर पानी पहुंच गया है। इससे ग्रामीणों को पानी में घुसकर आवागमन करने के लिए विवश होना पड़ रहा है। ग्रामीणों द्वारा कई वर्षों से पुल निर्माण व कटान रोकने के लिए पत्थर की मांग करते रहे, परंतु इनको आज तक सुविधा प्रशासन व जनप्रतिनिधि मुहैया नहीं करा सके हैं।
आलापुर तहसील क्षेत्र के नदी के किनारे स्थित बाढ़ प्रभावित गांव आराजी देवारा व माझा कम्हरिया का क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहता है। जहां पर बाढ़ के समय ग्रामीणों को घरों तक पहुंचना काफी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीण किसी तरह नाव के सहारे आवागमन करते हैं।
माझा कम्हरिया के कल्लू का पूरा, नौका पूरा, पटपरवा, सतनारायण का पूरा व बद्री का पूरा तथा आराजी देवारा के हंसू का पूरा, करिया लोनिया का पूरा, प्रसाद कुर्मी का पूराबाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आता है। वहीं इंदौरपुर व घिनहापुर ग्राम पंचायत के सिद्धनाथ भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का एक हिस्सा है, जो बाढ़ के समय पानी से चारों तरफ घिर जाता है। इस बार अभी आराजी देवारा के प्रसाद कुर्मी का पूरा व हंसू का पूरा के रास्ते पर बाढ़ का पानी रास्ते पर पहुंच गया है।
इससे ग्रामीणों को पानी से होकर आवागमन करना पड़ रहा है। महिला देवराजी ने बताया कि हम लोगों को इसी तरह पानी के रास्ते से ही मजबूर होकर आवागमन करना पड़ रहा है। कई वर्ष से पुल की मांग हो रही है, लेकिन आज तक किसी जनप्रतिनिधि व प्रशासन के लोगों ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया। आराजी देवारा के हंशू का पूरा मार्ग पर लंबे अरसे से चली आ रही पुल की मांग ग्रामीणों द्वारा की जा रही थी।
इस पर विधायक अनीता कमल के प्रयास से पुल का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। परंतु निर्माण कार्य पूरा न होने के कारण इस वर्ष भी नदी के बाढ़ व बरसात के पानी से होकर ही ग्रामीणों को आवागमन करना पड़ रहा है।
माझा कम्हरिया के पूर्व प्रधान सतीराम यादव ने बताया कि ग्रामीण लगभग 15 वर्ष से बंधे से होकर प्रसाद कुर्मी का पूरा होते हुए नौका का पूरा तक जान जोखिम में डालकर आवागमन करते हैं। कम्हरिया के विजयी ने बताया कि यदि इसी तरह से नदी का जलस्तर बढ़ता रहा तो 1 सप्ताह बाद नदी के बाढ़ का पानी गांवों तक पहुंच जाएगा। सिद्धनाथ गांव की महिला माधुरी ने बताया कि बाढ़ के समय सिद्धनाथ गांव पानी से चारों तरफ घिर जाता है, जहां पर ग्रामीणों ने एक पुल का निर्माण कराए जाने की मांग की थी। परंतु आज तक पूरा नहीं हो सका। बद्री का पूरा निवासी राजेश निषाद ने बताया कि कटान को रोकने के लिए पत्थर की आवश्यकता है, जिससे मुख्य मार्गों व नदी के किनारे कटान को रोका जा सके।