पंचायत चुनाव की आड़ में कर्मचारियों ने मनमानी शुरू कर दी है। सुबह दफ्तर तो खुल जाते हैं पर कर्मियों के न रहने से वहां दिनभर सन्नाटा पसरा रहता है। अधिकतर दफ्तरों में चुनाव के अलावा कोई कामकाज ही नहीं हो रहा है। फरियादियों को चुनाव बाद आने को कहा जा रहा है।
मंगलवार को भी दफ्तरों में सन्नाटा पसरा दिखाई दिया। दफ्तरों के दरवाजे लोगों के लिए खुले पर उनकी समस्या सुनने के लिए वहां कोई मौजूद नहीं था। कुर्सियां खाली पड़ी थी। जो फरियादी शिकायत लेकर दफ्तर पहुंचे, वे घंटों इंतजार के बाद मायूस होकर लौट गए।
नलकूप खंड कार्यालय, दोपहर बाद दफ्तर में तीन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मौजूद थे। लेकिन अधिशासी अभियंता से लेकर अवर अभियंता तक कोई अधिकारी उपस्थित नहीं मिला। लिपिकों के सभी कक्ष खुले मिले। पर कुर्सी पर बैठा कोई कर्मी नहीं मिला।
मेज पर न तो कोई पत्रावली दिखी और न ही कामकाज किए जाने का कोई अन्य सुबूत। ढोमनेपुर प्राथमिक विद्यालय में हैंडपंप खराब है। इसकी जानकारी लेने पहुंचे ग्रामीणों को दफ्तर में कोई नहीं मिला। घंटों इंतजार के बाद वे निराश लौट गए।
उद्यान विभाग, दोपहर तीन बजे के करीब दफ्तर में एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मौजूद था। एक कक्ष में ताला लटका हुआ था। जबकि दो अन्य कक्ष खुले थे। मौके पर कोई उद्यान निरीक्षक या अन्य कर्मचारी नहीं मिला। यहां भी कर्मचारियों की कुर्सियां खाली पड़ी थीं।
आलू बुवाई को लेकर योजना की जानकारी करने पहुंचे कटेहरी के रामकिशुन दो घंटे से इंतजार करते मिले। किसी के न मिलने के बाद वे मायूस होकर लौट गए।
समाज कल्याण, विकास भवन स्थित समाज कल्याण कार्यालय व अर्थसंख्या कार्यालय में सन्नाटा पसरा मिला। यहां पेंशन की जानकारी करने आई वृद्ध महिला दुर्गावती व नंदा काफी देर से परेशान दिखी। बिना किसी जानकारी के ही उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ा।
सीढ़ियों से नीचे उतरे समय उन्होंने दर्द बयां करते हुए कहा कि चुनाव की ड्यूटी लगाते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि कार्यालय में एक दो जिम्मेदार कर्मचारी जरूर मौजूद रहे, जिससे फरियादियों की समस्याएं कुछ हद तक तो जरूर निपट सकें।
चुनाव के दौरान अफसरों और कर्मियों की मनमानी कोई नई बात नहीं है। बीते जिला पंचायत व क्षेत्र पंचायत चुनाव में भी कुछ इस तरह मनमानी सामने आई थी। चुनाव समाप्त होने के ठीक बाद आयोजित हुए तहसील दिवस से 12 जिला स्तरीय अधिकारी नदारद थे।
डीएम विवेक ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए न सिर्फ उनका वेतन रोकने का निर्देश दिया था बल्कि सेवा में व्यवधान दर्ज किए जाने संबंधी कारण बताओ नोटिस भी जारी कर दिया था। अब ग्राम प्रधान चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के बाद अधिकारियों व कर्मचारियों का रवैया फिर जस का तस हो गया है।
मंगलवार को ‘अमर उजाला’ टीम ने कई कार्यालयों का जायजा लिया तो वहां पूरी तरह सन्नाटे का माहौल दिखा। वन विभाग दफ्तर में दोपहर 12 बजे के करीब सन्नाटा पसरा मिला। तीन कर्मचारी ही मौजूद मिले। उनके पास अन्य कर्मियों के न आने की कोई जानकारी नहीं थी।
दरअसल, चुनाव ड्यूटी के आड़ में कर्मचारी कार्यालयों से गायब होकर या तो घर चले जा रहे हैं या फिर ऑफिस में रहने की बजाए चाय की दुकानों पर चुस्की लगाते दिख रहे हैं।