भीटी (अंबेडकरनगर)। क्षेत्र के बढ़ैया में श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन मंगलवार को प्रवाचक डॉ. रमाकांत उपाध्याय ने कंस वध व रुक्मिणी विवाह का वर्णन किया। देवकी और वसुदेव की संतानों को मारने के बाद उसने प्रजा को भी भय, अत्याचार और यातनाओं में जकड़ लिया था। इसके अंत के लिए ही श्रीकृष्ण का अवतार हुआ। जैसे ही समय आया, श्रीकृष्ण ने मथुरा पहुंचकर कंस का वध कर दिया और उसके आतंक से मुक्ति दिलाई। विदर्भ नरेश भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी श्रीकृष्ण को ही अपना स्वामी मानती थीं, लेकिन उनका विवाह शिशुपाल से तय कर दिया गया। प्रवाचक ने कहा कि विनम्रता को जीवन का आधार बनाना चाहिए। सच्चे प्रेम और विश्वास में शक्ति होती ह। ईश्वर पर भरोसा संकट से उबारता है। इस दौरान प्रवाचक राम तिलक पांडेय, महेंद्र, अनिल, मुकेश व अन्य उपस्थित रहे।