अंबेडकरनगर। बहुचर्चित मुंबई कारोबारी रामजी वर्मा अपहरण व हत्याकांड में आरोपी शंकर मारुति जाधव को जिला एवं सत्र न्यायाधीश चंद्रोदय कुमार की अदालत ने नियमित जमानत दे दी है। अदालत ने माना कि प्रथम दृष्टया आरोपी के खिलाफ ऐसा कोई प्रत्यक्ष या स्वतंत्र साक्ष्य नहीं है, जिससे उसकी संलिप्तता स्पष्ट रूप से स्थापित हो सके।
अभियोजन के अनुसार सुल्तानपुर निवासी पूनम वर्मा ने शिकायत दी थी कि उनके पति रामजी वर्मा, जो मुंबई में रहकर कारोबार करते थे, 9 मई 2024 को वाराणसी दर्शन के लिए निकले थे। वहां उनकी मुलाकात अयोध्या निवासी कमल प्रसाद यादव और संजय यादव से होनी थी। जांच के बाद पुलिस ने कमल प्रसाद और संजय यादव के अलावा प्रकाश में आए शंकर जाधव के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया। अभियोजन के अनुसार मृतक के खाते से निकाली गई धनराशि अंततः साई ट्रांसपोर्ट कंपनी के माध्यम से शंकर जाधव के खाते तक पहुंची थी। सत्र न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद कहा कि पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है। जांच पूरी हो चुकी है और आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है, इसलिए अब आरोपी से हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है। सहआरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है।